नर्मदापुरम 26,दिसम्बर,2025(हिन्द संतरी ) भले है क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी नर्मदापुरम श्रीमती रिंकू शर्मा ने केन्द्रीय मोटरयान नियम, 1989 के नियम 55 ए के तहत बिना वैध प्राधिकार पत्र के पुराने वाहनों की खरीदी बिक्री का कार्य पर रोक लगाने को कहा है किन्तु उनके कार्यालय के चल रही अंधेरगर्दी और रिश्वतखोरी की दास्ताँ पुरानी कहावत सिद्ध करती है की सौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली, भले इस नियम के तहत प्राधिकार पत्र हेतु संबंधित पंजीयन प्राधिकारी जिसके क्षेत्राधिकार में ऐसा डीलर अपना व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित करना चाहता है, को फॉर्म 29 ए में वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने और उसकी फीस 25 हजार जमा की बात की गई है, किन्तु प्रश्न वही है की आरटीओ कार्यालय को वे कर्मचारी संचालित कर रहे है जिनका स्थानान्तरण होने के बाद वे कार्यालय से टस से मस नहीं हुए उलटे उनके सगे सम्बन्धी आरटीओ के चेंबर में होने पर हर फ़ाइल के निपटाने की सौदेवाजी तय कर अवैध वसूली में लगे है, जिसका प्रमाण उनके कमरे में लगे केमरो के प्रतिदिन के रिकार्ड की जांच को समझा जा सकता है ।
उक्त आवेदन प्राप्त होने के 30 दिवस के अन्दर संबंधित पंजीयन प्राधिकारी द्वारा संतुष्ट होने पर नेपर डिजिटली फॉर्म 29 में प्राधिकार पत्र प्रदान किया जायेगा। उक्त आवेदन को अस्वीकृत किए जाने की स्थिति में पंजीयन प्राधिकारी द्वारा आवेदक को सुनवाई का अवसर देने उपरांत आवेदन अस्वीकृति करने का स्पष्ट उल्लेख लिखित में किया जाएगा। ऐसे उसके डीलर के पास उसके आधिपत्य के वाहनों को रखने हेतु पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए तथा ऐसे वाहनों को आम रास्ते पर पार्क नहीं किया जायेगा। उक्त नियमों के नियम 55 वी के तहत वाहन स्वामी द्वारा उस पंजीयन प्राधिकारी जिसके कार्यालय में वाहन पंजीकृत है उनको फॉर्म 29 सी में प्राधिकृत डीलर को अपना वाहन सुपुर्द करने की सूचना वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन देना होगी। उक्त फॉर्म पर वाहन स्वामी तथा प्राधिकृत डीलर द्वारा सम्यक रूप से हस्ताक्षर किए जायेंगे तथा फॉर्म को वाहन पोर्टल पर अपलोड किया जायेगा तथा पोर्टल पर उक्त फॉर्म सबमिट होते ही वाहन डेटाबेस में संबंधित प्राधिकृत डीलर का नाम डीम्ड ऑनर के रूप में प्रदर्शित होने लगेगा।
यदि किसी भी समय वाहन स्वामी प्राधिकृत डीलर से अपना वाहन वापस लेता है तो उसे उक्त प्रक्रिया अनुसार फॉर्म 29 डी में प्राधिकृत डीलर से अपना वाहन वापस लेने की सूचना वाहन पोर्टल पर ऑनलाइन देना होंगी तथा पोर्टल पर फॉर्म 29डी सबमिट होते ही वाहन डेटाबेस में संबंधित प्राधिकृत डीलर का नाम डीम्ड ऑनर के रूप में हट जायेगा। नियम 55सी के तहत ऐसा डीम्ड ऑनर वाहन से संबंधित दस्तावेजों यथा बीमा, पंजीयन, फिटनेस, पीयूसीसी आदि की वैधता तथा वाहन से संबंधित किसी भी घटना के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा तथा ऐसा प्राधिकृत डीलर फॉर्म 29सी के अंतर्गत प्राप्त अपने आधिपत्य के वाहनों के पंजीयन प्रमाण पत्र/फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण, डुप्लीकेट पंजीयन प्रमाण पत्र, एनओसी तथा वाहन के स्वामित्व अतरण का आवेदन करने हेतु सक्षम होगा।
प्राधिकृत डीलर को अपने आधिपत्य के वाहनों की सूचि फॉर्म 29 में इलेक्ट्रॉनिकली पोर्टल पर संधारित करना होगी। नियम 55डी के तहत प्राधिकृत डीलर नियम 55 के अंतर्गत अपने आधिपत्य के वाहनों का सार्वजनिक स्थलों पर निम्नांकित प्रयोजनों के अलावा उपयोग नहीं कर सकेगा। किसी संभावित खरीदार के फायदे के लिए उचित ट्रायल या डेमोस्ट्रेशन या प्रदर्शनी के लिए या पेंटिंग या मरम्मत के उद्देश्य से सर्विस सेंटर जाने या वहां से लौटने के लिए या रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या फिटनेस सर्टिफिकेट के रिन्यूअल के उद्देश्य से होगा।
