
नर्मदापुरम 25 फरवरी 2026 (हिन्द संतरी) जिला सहकारी बैंक के तत्कालीन मुख्यकार्यपालन अधिकारी आर के दुबे द्वारा गबन राशि 300 करोड़ के खुले भ्रष्टाचार में जहाँ वर्ष 2011-12 से 2015-16 तक हुई गेहूं खरीदी में 125 करोड़ का गोलमाल करने सहित अन्य मदों में 80 करोड़ रूपये के आलावा कर्ज मांफी एवं राहत योजना का फर्जी समायोजन का प्रमाण पत्र देने की प्रमाणित गबन की राशि 25 करोड़ 97 लाख 76 हजार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो भोपाल में प्रकरण क्रमांक 38/2011 दर्ज होने एवं रीवा बैंक में वर्ष 2003 से 2005 में 28 करोड़ रूपये की वसूली कार्यवाही के बाद भी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भरत राजपूत जी ने उन्हें अनेक प्रकरणों में क्लीनचिट देकर उनकी फाइलों को नस्तीबद्ध कर घोर अपराध कर बैंक को नुकसान पहुचाया है, क्या बैंक की प्रशासक पड़ें कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना बैंक के इन घोटालों की दबी फाइलों को खोलकर दुबे को संरक्षण देने वालों पर अपराध दर्ज कर कर अपेक्स बैंक के केडर अधिकारी रविन्द्र कुमार दुबे की सेवा निर्वृति पूर्व उक्त वसूली उससे कर पाएंगी, यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है ।
देखा जाए तो नागरिक अधिकार जनसमस्या निराकरण कमेठी के अध्यक्ष की शिकायत पर प्रमुख सचिव अजीत केसरी और रजिस्ट्रार कवींद्र कियावत ने आनन-फानन में सहकारी बैंक अफसरों की बैठक बुलाकर पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए। तीन घंटे की बैठक के बाद सीईओ से रजिस्ट्रार बोले- जांच के बाद कार्रवाई करो 10 जुलाई 2017 को वल्लभ भवन भोपाल में इस गोलमाल को लेकर एक मैराथन बैठक चली। इस बैठक में सहकारिता विभाग के पीएस अजीत केसरी, रजिस्ट्रार कवींद्र कियावत, अपेक्स बैंक के ओएसडी महेंद्र दीक्षित, उर्पाजन आयुक्त मीरा ओसवाल के अलावा होशंगाबाद-हरदा जिला सहकारी बैंक के सीईओ आरबीएस ठाकुर, विशिष्ट अधिकारी आलोक यादव ने करीब तीन घंटे तक माथापच्ची की। बैठक में साफ हो गया कि मामला गंभीर है और करीब 125 करोड़ का नुकसान चार साल की अवधि में गेंहू खरीदी के दौरान हुआ है। इसके बाद रजिस्ट्रार कवींद्र कियावत के निर्देश पर पूरे मामले की जांच कर हुई और तत्कालीन सीईओ आरके दुबे के खिलाफ रिकवरी से लेकर एफआईआर तक की तैयारी हुई। वर्ष 2011-12 से 2015-16 के दौरान 5 करोड़ 51 लाख 48 हजार 216 टन गेहूं का उर्पाजन किया गया। रिकार्ड मिलान में 4 लाख 27 हजार 270 क्विंटल गेहूं कम पाया गया, जिसकी कीमत 60 करोड़ 55 लाख से ज्यादा थी जिसका परिवहन स्तर पर 2 लाख 97 हजार 944 क्विंटल गेहूं कीमत करीब 41 करोड़ 55 लाख का शार्टेज सामने आया वही समिति स्तर पर 1 लाख 29 हजार 223 क्विंटल गेहूं जिसकी कीमत करीब 18 करोड़ 65 लाख रूपए नुकसान और स्टेंशिल और पुअर स्ट्रेचिंग सहित वारदाने के रूप में 11 करोड़ 79 लाख रूपए का नुकसान होना पाया जो आर के दुबे से वसूलीयोग्य था।
इन मामलों में बैंक में गबनकर्ता मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरके दुबे को बैंक की और से 3 मार्च 2015, 28 जुलाई 2016 को गबन राशि को लेकर स्पष्टीकरण देने सहित 23 अप्रेल 2018 को 3 नोटिस जारी किये जिसका उत्तर न आने पर सेवासमाप्ति का दण्ड देने का निर्णय लिया गया किन्तु बैंक के अध्यक्ष श्री राजपूत सहित अन्य सभी संचालकगण भ्रष्ट आरके दुबे को विधान के विपरीत भ्रष्टाचार से बचाने के पक्ष में एक हो गया और नियम और कानून के विपरीत दोषी आरके दुबे को पूरा संरक्षण देकर क्लीनचिट दे दी । जिस बैंक ने अध्यक्ष और संचालक का मान सम्मान और धन कमाने का अवसर दिया उस बैंक की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने में ये नही चुके, निश्चित रूप से इसमें मोटी डील से इंकार नही किया जा सकता है। अगर आज बैंक के प्रशासक बैंक के रिकार्ड में गबन धोखाधडी के फाइलों को तलाशे और दिए गए नोटिस दिनाकों के स्पष्टीकरण की बजाय फाइलों को नस्तीबद्ध करने का सच सामने लाये तो संचालकों सहित बैंक के आरोपी सीईओ पर भी आपराधिक मामला कायम हो सकेगा , इससे इंकार नहीं किया जा सकता है, बस आवश्यकता है कलेक्टर को हिम्मत जुटाने की ताकि वे अपने बैंक को लक्ष्य की और ले जाने में पहली आहुति डालने का मन बनाये? जो युवा और साहसी होने से उनसे उम्मीद है। क्रमशः
