एक हालिया इंटरव्यू में तापसी ने स्पष्ट किया कि उनके पिछले बयानों को लोगों ने गलत तरीके से समझा। उन्होंने उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा नहीं बनाया था, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री की मानसिकता पर सवाल उठाए थे। तापसी ने कहा, “मुद्दा यह नहीं है कि कौन सा हिस्सा हाइलाइट किया जा रहा है, मुद्दा यह है कि यह एक तरह की ‘ताड़ना’ है। लोग कहते हैं कि साउथ में कमर (मिडरिफ) पर फोकस होता है और हिंदी फिल्मों में क्लीवेज पर, लेकिन मेरे लिए यह सिर्फ एक ऑब्सेशन है जो दोनों जगह मौजूद है।”
तापसी ने अपने करियर के शुरुआती दिनों का एक बेहद असहज कर देने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह साउथ की फिल्मों में काम कर रही थीं, तब उन्हें ब्रा में पैड लगाने (Padding) के लिए कहा गया था। तापसी ने बताया कि सेट पर जब महिलाएं कम होती हैं, तो इस तरह की बातें कहना डायरेक्टर के लिए भी अजीब होता है, इसलिए वे किसी और के जरिए यह संदेश भिजवाते हैं। उन्होंने उस असहज प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा, “जब हिरोइन वैन से बाहर आती है, तो डायरेक्टर को चेक करना होता है कि जो लुक उन्होंने चाहा था, वह मिला या नहीं। यह पूरा प्रोसेस एक कलाकार के लिए बहुत अनकम्फर्टेबल होता है।”
बॉलीवुड में अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यहां उन्हें कभी कमर दिखाने या पैडिंग के लिए मजबूर नहीं किया गया, क्योंकि उन्होंने यहां ज्यादा ग्लैमरस रोल नहीं किए। हालांकि, करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने डायरेक्टर्स की इन मांगों को एक हद तक माना भी। तापसी के अनुसार, तब मैं नई थी और मुझे लगता था कि डायरेक्टर ‘शिप का कैप्टन’ है, उसे सब पता होगा। जब आप देखते हैं कि बाकी सभी हिरोइनें ऐसा कर रही हैं, तो आप भी इसे प्रोफेशन का हिस्सा मान लेते हैं।” तापसी का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो इंडस्ट्री में महिलाओं के चित्रण और जेंडर सेंसिटिविटी पर नई बहस छेड़ रहा है।
