नई दिल्ली/कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के खिलाफ 14 आरोपों वाली चार्जशीट जारी करते हुए चुनावी मोर्चे पर जोरदार हमला बोला। शाह ने कहा कि यह चार्जशीट किसी पार्टी की नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों की है। उन्होंने साफ किया कि अब बंगाल की जनता तय करेगी कि वे भय को चुनेंगे या भरोसे को। अमित शाह ने ममता राज में भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव की राजनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजनीति अब खत्म होने वाली है।
अमित शाह ने ममता बनर्जी पर विक्टिम कार्ड की राजनीति करने का आरोप लगाया। शाह के अनुसार कभी उनका पैर टूट जाता है, कभी सिर पर पट्टी, कभी बीमार पड़ना और कभी चुनाव आयोग के सामने बेबसी का नाटक करना यह सब उनकी राजनीति का हिस्सा है। शाह ने कहा कि बंगाल के लोग अब इस राजनीति को भलीभांति समझ चुके हैं और इसका अंत होगा।
उन्होंने आगामी बंगाल चुनाव को ‘भय से मुक्ति का चुनाव’ बताया। शाह ने कहा कि माइनॉरिटी होने के डर से लोग अपने अधिकारों से वंचित न रहें, इस दिशा में बीजेपी जनता की आवाज को मुखर बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी की अराजकता, आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक विफलताओं को बीजेपी जनता तक पहुंचा रही है।
बीजेपी की रणनीति पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता लगातार जनता तक संदेश पहुंचा रहे हैं और बंगाल में लगातार बढ़त बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश की सुरक्षा बंगाल के चुनाव से जुड़ी है और देश में एक ऐसा राज्य है जिससे घुसपैठ का रास्ता खुलता है।
शाह ने जोर देकर कहा कि अब जनता की आवाज को दबने नहीं दिया जाएगा और बीजेपी ने तय किया है कि चुनाव में जनता के मुद्दों को प्रमुखता मिलेगी। उन्होंने ममता सरकार के 15 साल के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार, अराजकता और भेदभाव के मामलों को सबके सामने लाने का दावा किया।
इस चार्जशीट और अमित शाह के बयान से स्पष्ट है कि बीजेपी बंगाल चुनाव 2026 में पूरी ताकत से जनता तक पहुंचना चाहती है और इस चुनाव को राज्य में भय और भरोसे के बीच निर्णायक मुकाबला बनाने की रणनीति अपना रही है।
