हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां संतोषी भगवान गणेश की पुत्री हैं। शुक्रवार के दिन उनका व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में खट्टी चीजों का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। भक्त माता को गुड़, चना, केला और सफेद मिठाई का भोग लगाते हैं।
कैसे करें संतोषी माता की पूजा?
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। माता को फूलों की माला अर्पित करें और सिंदूर, हल्दी तथा अक्षत चढ़ाएं।
इसके बाद कलश स्थापना करें। कलश में जल भरकर आम के पत्ते रखें और उसके पास घी का दीपक जलाएं। पूजा में अगरबत्ती और धूप का प्रयोग करें। माता को गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाएं। पूजा के दौरान संतोषी माता की कथा सुनना या पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। अंत में माता की आरती करें और प्रसाद सभी में बांटें।
व्रत के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजें खाना पूरी तरह निषिद्ध माना गया है। व्रती को दिनभर संयम और शुद्धता बनाए रखनी चाहिए। कई लोग इस व्रत में केवल एक समय भोजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
क्या है इस व्रत का महत्व?
मान्यता है कि मां संतोषी का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, वहीं नौकरी और कारोबार में भी सफलता मिलने की मान्यता है। छात्र-छात्राओं के लिए भी यह व्रत शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे शिक्षा और परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार मां संतोषी अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं और जीवन में संतोष का भाव बनाए रखती हैं। इसलिए शुक्रवार का यह व्रत आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
