इस साल गार्डन में लगभग 18 लाख ट्यूलिप के फूल लगाए गए हैं जिनमें 70 से 75 अलग अलग किस्में शामिल हैं। इन फूलों के रंग और उनकी विविधता पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही है। सुबह और शाम के समय जब सूरज की किरणें इन फूलों पर पड़ती हैं तो पूरा गार्डन सुनहरे रंगों में नहाया हुआ दिखाई देता है जिसे देखने के लिए लोग खास तौर पर गोल्डन आवर का इंतजार करते हैं।
गार्डन प्रशासन के अनुसार पहले यह गार्डन अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में खोला जाता था लेकिन इस बार पर्यटकों की बढ़ती मांग और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे दो हफ्ते पहले ही खोल दिया गया। इसका असर साफ तौर पर देखने को मिला और शुरुआत से ही यहां भारी भीड़ जुटने लगी। रमजान के दौरान जहां रोजाना 4 से 5 हजार लोग आते थे वहीं ईद के बाद यह संख्या बढ़कर 10 से 12 हजार तक पहुंच गई जिसमें बड़ी संख्या स्थानीय लोगों की भी रही।
पर्यटकों के बीच इस गार्डन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों के साथ साथ विदेशी सैलानी भी यहां पहुंच रहे हैं। लोग इसकी तुलना यूरोप के प्रसिद्ध फूलों के बागानों से कर रहे हैं और इसे धरती पर स्वर्ग जैसा अनुभव बता रहे हैं। ज़बरवान पर्वतमाला और डल झील की पृष्ठभूमि में खिले ये ट्यूलिप फूल पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बन रहे हैं।
वाराणसी से आए एक पर्यटक ने बताया कि उन्होंने इस जगह के बारे में बहुत सुना था लेकिन यहां आकर उन्हें इसकी असली खूबसूरती का एहसास हुआ जो उम्मीद से कहीं ज्यादा शानदार है। वहीं एक अन्य पर्यटक ने कहा कि कई दिन बाद आने के बावजूद फूल पूरी तरह खिले और ताजगी से भरे हुए थे जो इस गार्डन की खासियत को दर्शाता है।
इस गार्डन को तैयार करने में सैकड़ों माली और कर्मचारी महीनों तक मेहनत करते हैं। करीब छह महीने की योजना और देखभाल के बाद यह बाग जनता के लिए खोला जाता है। इसकी इसी भव्यता और विशालता के कारण इसे एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिल चुकी है। लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में यह गार्डन न केवल कश्मीर बल्कि पूरे देश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
