पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता ने एक सत्र के दौरान रामायण से प्रेरित एक कहानी सुनाई जो उनके अनुसार बच्चों के थिएटर वर्कशॉप का हिस्सा थी। इस कहानी के वर्णन के दौरान उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण के साथ-साथ रावण के पात्रों का जिक्र करते हुए आधुनिक कर व्यवस्था यानी जीएसटी पर कटाक्ष किया। अभिनेता द्वारा इस पौराणिक कथा को आधुनिक संदर्भों में मजाकिया ढंग से पेश करने के प्रयास को कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भगवान का अपमान माना है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद लोगों ने उनकी कड़ी आलोचना की और इसे सनातन धर्म की मान्यताओं के साथ खिलवाड़ बताया है।
कानूनी शिकायत दर्ज कराने वाले भानु प्रकाश ने अधिकारियों से मांग की है कि न केवल प्रकाश राज बल्कि उनके ऐसे बयानों का समर्थन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के बयानों का मुख्य उद्देश्य धार्मिक कथाओं को गलत तरीके से पेश करना और समाज में वैमनस्य फैलाना है। इससे पहले भी सोलह अप्रैल को एक वकील द्वारा इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है जिसमें कहा गया था कि धार्मिक मान्यताओं का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश राज अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं पर इस बार मामला सीधे तौर पर धार्मिक ग्रंथों से जुड़ा होने के कारण काफी गंभीर हो गया है।
एक तरफ जहां अभिनेता अपनी आगामी बड़ी फिल्मों की तैयारियों में व्यस्त हैं वहीं दूसरी ओर इन कानूनी विवादों ने उनकी पेशेवर छवि को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में प्रकाश राज वाराणसी और स्पिरिट जैसी बहुप्रतीक्षित फिल्मों का हिस्सा हैं जिनमें वे बड़े सितारों के साथ नजर आने वाले हैं। इन विवादों के बीच फिल्म उद्योग के भीतर भी इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां करना उचित है। फिलहाल पुलिस प्रशासन शिकायतों की जांच कर रहा है और यह देखना होगा कि इस मामले में कानून क्या रुख अपनाता है।
