विशेषज्ञों के अनुसार अचार में फफूंदी लगने का सबसे बड़ा कारण नमी और हवा का संपर्क है। जब भी जार के अंदर नमी पहुंचती है या अचार खुले वातावरण के संपर्क में आता है, तो उसमें फफूंदी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। कई बार छोटी-छोटी गलतियां जैसे गीला चम्मच इस्तेमाल करना या जार को खुला छोड़ देना भी इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।
गंध और स्वाद से मिलते हैं शुरुआती संकेत
अचार खराब होने का पहला संकेत उसकी गंध से मिलता है। ताजा अचार की खुशबू तीखी और खट्टी होती है, लेकिन अगर उसमें सड़ी हुई या अजीब सी बदबू आने लगे, तो यह खराब होने का संकेत है। कई बार स्वाद में भी बदलाव आने लगता है, जिससे अचार कड़वा, फीका या अजीब सा लगने लगता है। ऐसे अचार का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बनावट और रंग में बदलाव भी खतरे का संकेत
जब अचार खराब होने लगता है, तो उसकी बनावट में भी बदलाव दिखाई देता है। अगर अचार चिपचिपा, बहुत नरम या रंग बदलने लगे, तो इसे खाने से बचना चाहिए। उदाहरण के लिए आम का अचार भूरा और मुलायम हो जाए या लहसुन का अचार लिसलिसा महसूस हो, तो यह संकेत है कि उसमें खराबी शुरू हो चुकी है।
तेल की स्थिति भी काफी अहम होती है। अगर अचार का तेल धुंधला दिखे, अलग-अलग परतों में बंट जाए या उसमें झाग बनने लगे, तो यह भी खराबी की निशानी है।
अचार में फफूंदी क्यों लगती है?
Pickle में फफूंदी तब लगती है जब उसमें नमी, हवा या गंदगी पहुंच जाती है। कई बार अचार को स्टोर करते समय सावधानी नहीं बरती जाती, जिससे बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ने लगते हैं।
अचार को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?
Pickle को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। हमेशा सूखे और साफ चम्मच का इस्तेमाल करें, क्योंकि एक बूंद पानी भी फफूंदी का कारण बन सकती है। जार को हर बार अच्छी तरह बंद करें ताकि हवा अंदर न जा सके।
अचार को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखें। सीधी धूप और ज्यादा गर्मी मसालों और तेल को खराब कर सकती है। इसके अलावा ध्यान रखें कि अचार पूरी तरह तेल की परत में ढका रहे। अगर तेल कम हो जाए, तो ऊपर से साफ तेल डालकर उसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर अचार को लंबे समय तक ताजा और स्वादिष्ट रखा जा सकता है, जिससे उसका असली स्वाद बरकरार रहता है और वह फफूंदी से सुरक्षित रहता है।
