दिनभर काम के दौरान कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन पर समय बिताने के बाद भी कई लोग रात में भी फोन का इस्तेमाल जारी रखते हैं। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या देर रात तक चैटिंग करना अब एक सामान्य आदत बन चुकी है। धीरे-धीरे यह पैटर्न शरीर और दिमाग दोनों को थका देता है, लेकिन व्यक्ति को इसका एहसास तब होता है जब नींद प्रभावित होने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन का समय है। इससे शरीर का प्राकृतिक नींद तंत्र बाधित होता है। आमतौर पर शरीर रात के समय मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है। लेकिन जब व्यक्ति सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखता है, तो इस हार्मोन का निर्माण प्रभावित होता है।
इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को समय पर नींद नहीं आती और वह बिस्तर पर लंबे समय तक करवटें बदलता रहता है। लगातार ऐसा होने पर नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता। इसका असर अगले दिन थकान, सिर भारी रहना, आंखों में जलन और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है।
खराब स्लीप साइकिल का प्रभाव केवल थकान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह धीरे-धीरे शरीर की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। नींद पूरी न होने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता घटती है, काम में मन नहीं लगता और मानसिक थकान बढ़ जाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर मानसिक स्वास्थ्य और हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
आजकल कई लोग सुबह उठने में परेशानी महसूस करते हैं और दिनभर सुस्ती बनी रहती है। इसका एक बड़ा कारण अनियमित नींद और देर रात तक स्क्रीन का उपयोग है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति धीरे-धीरे शरीर की प्राकृतिक लय को बिगाड़ देती है, जिसे ठीक होने में समय लग सकता है।
हालांकि, कुछ आसान बदलाव अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाना सबसे प्रभावी कदम माना जाता है। इसके अलावा रात के समय हल्की रोशनी में रहना, अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचना और नींद के लिए शांत माहौल तैयार करना मददगार हो सकता है।
दिनभर स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों को बीच-बीच में आंखों को आराम देना भी जरूरी है, ताकि आंखों और दिमाग पर दबाव कम हो सके। सोने से पहले किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या परिवार के साथ समय बिताना भी नींद को बेहतर बनाने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, बेहतर स्वास्थ्य के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है और अच्छी नींद के लिए स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखना आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके स्लीप साइकिल को सुधारा जा सकता है और शरीर को फिर से प्राकृतिक ऊर्जा और संतुलन दिया जा सकता है।
