नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत को एक “भरोसेमंद मध्यस्थ” के रूप में देखा जा सकता है, जो तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।
रूस का कहना है कि पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में तनाव काफी बढ़ा है, जिसमें ईरान-अमेरिका टकराव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में किसी ऐसे देश की जरूरत है जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास पैदा कर सके और बातचीत का रास्ता खोल सके। लावरोव के अनुसार, भारत इस भूमिका के लिए उपयुक्त है क्योंकि वह किसी एक खेमे का हिस्सा न होकर सभी प्रमुख देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखता है।
लावरोव ने यह भी कहा कि भारत का कूटनीतिक अनुभव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स, जी20 और शंघाई सहयोग संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता उसे मध्यस्थता की भूमिका के लिए और मजबूत बनाती है।
रूस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत केवल सुरक्षा या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। ऐसे में किसी स्थिर और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देशों की नीतियां इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रही हैं, जबकि समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और अरब देशों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सही नहीं है।
भारत को लेकर रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
कुल मिलाकर रूस का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जहां वह अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाला अहम देश बनता जा रहा है।
