अमित दुबे के अनुसार, लोग अक्सर सोचते हैं कि PhonePe या GPay जैसे ऐप्स सीधे पैसे ट्रांसफर करते हैं, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। ये सभी ऐप्स सिर्फ एक “स्किन” की तरह काम करते हैं, जबकि असली पेमेंट प्रोसेस NPCI (National Payments Corporation of India) के जरिए होता है। यानी ये ऐप्स केवल एक इंटरफेस हैं, असली सिस्टम बैंक और NPCI के बीच काम करता है।
अमित दुबे ने कहा कि ICICI, SBI, Kotak Mahindra जैसे बैंकों के मोबाइल बैंकिंग ऐप्स में भी UPI की सुविधा मौजूद होती है, और वहां से पेमेंट करना ज्यादा भरोसेमंद माना जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों को अलग-अलग UPI ऐप्स डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बैंकिंग ऐप से ही पूरा काम हो सकता है।
इसके विपरीत, बैंकिंग ऐप से पेमेंट करने पर सीधा बैंक से संपर्क होता है। अगर कोई फ्रॉड या ट्रांजैक्शन से जुड़ी समस्या होती है, तो बैंक अपने ग्राहकों को बेहतर सपोर्ट दे सकता है। कई मामलों में ग्राहक को रिलेशनशिप मैनेजर या बैंक हेल्पलाइन के जरिए तुरंत मदद मिल जाती है।
साइबर एक्सपर्ट का मानना है कि यही सबसे बड़ा फर्क है, जो बैंकिंग ऐप्स को ज्यादा सुरक्षित बनाता है। उनका कहना है कि UPI सिस्टम सुरक्षित है, लेकिन समस्या ऐप के सपोर्ट सिस्टम और शिकायत निवारण प्रक्रिया में आती है।
हालांकि, यह भी सच है कि PhonePe और GPay जैसे ऐप्स यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस, कैशबैक ऑफर और आसान ट्रांजैक्शन सुविधा देते हैं, जिसकी वजह से करोड़ों लोग इन्हें रोजाना इस्तेमाल करते हैं। लेकिन सुरक्षा और फ्रॉड की स्थिति में बैंकिंग ऐप्स को ज्यादा मजबूत विकल्प माना जा सकता है।
अंत में विशेषज्ञों की राय यही है कि UPI सुरक्षित तकनीक है, लेकिन किस ऐप के जरिए इसे इस्तेमाल किया जा रहा है, यह भी सुरक्षा और सपोर्ट के लिहाज से अहम भूमिका निभाता है।
