हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI से बनी तस्वीरों में अब भी कुछ ऐसी छोटी गलतियां रह जाती हैं जिन्हें ध्यान से देखकर पकड़ा जा सकता है। कई बार उंगलियां असामान्य दिखती हैं, दांतों की बनावट अजीब लगती है या चश्मा और ज्वेलरी सही तरीके से दिखाई नहीं देती। तस्वीरों में लिखा टेक्स्ट भी अक्सर उल्टा-पुल्टा या समझ से बाहर होता है। इसके अलावा रोशनी और छाया का असंतुलन, बैकग्राउंड में अननेचुरल चीजें और भीड़ में लोगों के चेहरे एक जैसे दिखना भी AI इमेज की पहचान हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल फोटो को जूम करके ध्यान से जरूर देखना चाहिए।
अब बड़ी टेक कंपनियां भी AI तस्वीरों की पहचान के लिए खास टूल्स तैयार कर रही हैं। OpenAI ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है जो यह पहचानने में मदद करता है कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या उसमें एडिटिंग की गई है। यूजर फोटो अपलोड करके उसकी जांच कर सकते हैं। सिस्टम तस्वीर में मौजूद डिजिटल पैटर्न और AI संकेतों को स्कैन करता है और फिर बताता है कि तस्वीर असली है या AI जनरेटेड।
वहीं Google का Gemini भी SynthID तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। यह तकनीक AI से तैयार तस्वीरों में मौजूद डिजिटल मार्कर्स को पहचानने में सक्षम मानी जाती है। यूजर Gemini में फोटो अपलोड करके सीधे पूछ सकते हैं कि तस्वीर AI से बनाई गई है या नहीं।
AI तस्वीरों की सच्चाई पता करने के लिए रिवर्स इमेज सर्च भी बेहद असरदार तरीका माना जा रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोई फोटो पहली बार इंटरनेट पर कहां दिखाई दी थी। अगर एक ही तस्वीर अलग-अलग दावों के साथ वायरल हो रही हो तो उसके फेक होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कंटेंट आने वाले समय में और ज्यादा स्मार्ट होगा, इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाली हर वायरल तस्वीर को बिना जांचे सच मानना खतरनाक साबित हो सकता है।
