ऋषभ अग्रवाल का शैक्षणिक सफर भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने संयुक्त प्रवेश परीक्षा यानी जेईई में ऑल इंडिया रैंक 33 हासिल की और इसके बाद आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए वे कनाडा गए जहां मॉन्ट्रियल स्थित विश्व प्रसिद्ध एआई रिसर्च संस्थान मिला से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में पीएचडी की। इस दौरान उन्होंने मशीन लर्निंग रिइन्फोर्समेंट लर्निंग और बड़े भाषा मॉडल जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में गहन शोध किया।
शिक्षा पूरी करने के बाद ऋषभ ने दुनिया की कई दिग्गज टेक कंपनियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने गूगल ब्रेन गूगल डीपमाइंड वायमो और मेटा सुपरइंटेलिजेंस लैब्स जैसी संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने मैकगिल यूनिवर्सिटी में अध्यापन भी किया। गूगल के लोकप्रिय एआई मॉडल जेम्मा और जेमिनी के विकास में भी उनका अहम योगदान माना जाता है। यही वजह है कि वैश्विक एआई इंडस्ट्री में उनकी पहचान एक प्रतिभाशाली रिसर्चर के रूप में स्थापित हो चुकी है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा सामने आया कि ऋषभ ने मेटा का करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये का पैकेज ठुकरा दिया। इस चर्चा के बाद खुद ऋषभ ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि उन्हें मिला ऑफर वायरल पोस्ट में बताई गई राशि से भी बड़ा था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल बड़ी सैलरी कमाना नहीं बल्कि नई तकनीक विकसित करने और अपने विजन को साकार करने की दिशा में काम करना है।
ऋषभ पिछले वर्ष मेटा की सुपरइंटेलिजेंस लैब से जुड़े थे लेकिन कुछ महीनों बाद ही उन्होंने इस्तीफा देकर उद्यमिता का रास्ता चुन लिया। उनका मानना है कि कई वर्षों तक दुनिया की शीर्ष कंपनियों में काम करने के बाद अब समय है कि वे अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाएं। इसी सोच के साथ वे अब पीरियॉडिक लैब्स नामक एआई स्टार्टअप के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं। इस स्टार्टअप को अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और एनवीडिया जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन भी मिल रहा है।
ऋषभ अग्रवाल की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं बल्कि भारतीय युवाओं की बदलती सोच की मिसाल भी है। आज देश के कई युवा ऊंची तनख्वाह वाली नौकरी के बजाय नवाचार और स्टार्टअप की राह चुन रहे हैं। एआई जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में भारत की प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। ऋषभ का निर्णय यह संदेश देता है कि यदि आपके पास ज्ञान अनुभव और स्पष्ट लक्ष्य है तो सुरक्षित रास्ता छोड़कर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। आने वाले वर्षों में उनका स्टार्टअप एआई की दुनिया में नया अध्याय लिख सकता है और भारतीय नवाचार को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकता है।
