अपने मासिक संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के अधिकांश हिस्सों में इस समय तेज गर्मी का प्रभाव देखा जा रहा है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना और अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी कारणवश बाहर जाना आवश्यक हो तो लोगों को पूरी तैयारी और सतर्कता के साथ निकलना चाहिए ताकि गर्मी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचा जा सके।
प्रधानमंत्री ने भारतीय जीवनशैली और पारंपरिक खानपान की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी से राहत पाने के कई उपाय हमारी रसोई और लोक परंपराओं में पहले से मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वैसे-वैसे देश के विभिन्न हिस्सों में खानपान और पेय पदार्थों की प्रकृति भी बदल जाती है। कहीं मिट्टी के मटकों का ठंडा पानी लोगों की प्यास बुझाता है तो कहीं दही और अन्य शीतल खाद्य पदार्थ भोजन का अहम हिस्सा बन जाते हैं। इसी तरह कई क्षेत्रों में कच्चे आम और अन्य पारंपरिक सामग्री से तैयार पेय गर्मी से राहत देने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पारंपरिक ग्रीष्मकालीन पेय केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विभिन्न राज्यों में तैयार किए जाने वाले ये पेय स्थानीय परिस्थितियों, मौसम और सामाजिक जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि इनका महत्व केवल खाद्य पदार्थ के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी देखा जाता है।
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोकप्रिय पारंपरिक पेयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर भारत में आम पन्ना गर्मी से राहत देने वाला एक लोकप्रिय पेय है। पंजाब और हरियाणा में लस्सी की अपनी अलग पहचान है, जबकि राजस्थान और गुजरात में छाछ को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। पूर्वी भारत के कई हिस्सों में सत्तू का शरबत गर्मी के मौसम में ऊर्जा और ताजगी प्रदान करने वाला प्रमुख पेय माना जाता है।
उन्होंने पश्चिमी और दक्षिणी भारत की परंपराओं का भी उल्लेख किया। कोंकण और गोवा क्षेत्र में कोकम आधारित पेय लोकप्रिय हैं, जबकि दक्षिण भारत में पानकम और सम्बारम जैसे पेयों का विशेष महत्व है। ओडिशा में बेल से तैयार पेय गर्मी के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सभी पेय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविधता के प्रतीक हैं।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे गर्मी के मौसम में पारंपरिक और प्राकृतिक पेयों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। उनका कहना था कि ये पेय न केवल शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी होते हैं। बढ़ते तापमान के बीच सावधानी, संतुलित खानपान और पर्याप्त जल सेवन ही स्वस्थ रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।
