वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विज़न की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और देश में रोजगार सृजन को गति देगा।
CEPA लागू होने के बाद ओमान में भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिल जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। पहले जहां केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर ही शुल्क-मुक्त पहुंच थी, अब यह दायरा बेहद व्यापक हो गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते से ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य अवधि में यह 10 अरब डॉलर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।
विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।
इस समझौते के तहत भारत ने भी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू—को किसी भी रियायत से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
इसके अलावा सोना-चांदी, आभूषण और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों पर भी सीमित या कोटा आधारित व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि यह संतुलित समझौता भारत के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार को मजबूती देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत की सेवाक्षेत्र अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि ओमान का आयात बाजार बड़ा और विविध है, जो भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।
