कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,185.43 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 26.45 अंक यानी 0.11 प्रतिशत मजबूत होकर 24,078.50 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और दिन के दौरान सेंसेक्स 77,646.27 अंक तथा निफ्टी 24,220.35 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे। हालांकि, बाद में मुनाफावसूली के कारण बढ़त कुछ सीमित हो गई।
व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की निरंतर भागीदारी और मजबूत आर्थिक संकेतकों ने बाजार को वैश्विक दबाव के बीच भी संतुलित बनाए रखा।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस, वित्तीय सेवाएं, फार्मा, हेल्थकेयर और ऑटो सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। दूसरी ओर धातु, सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। धातु कंपनियों पर कच्चे माल की लागत और वैश्विक मांग को लेकर बनी चिंताओं का असर दिखाई दिया।
प्रमुख कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी और बिकवाली दोनों का असर बना रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण बाजार पर दबाव बना था, जबकि बुधवार को शुरुआती रिकवरी मुख्य रूप से तकनीकी सुधार के रूप में सामने आई। उनका कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे और समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और आगामी आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
