मध्य प्रदेश । के जबलपुर जिले में स्थित Bargi Dam में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग, जिसकी अध्यक्षता Justice Sanjay Divedi कर रहे हैं, लगातार विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज कर रहा है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है।
जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने कई अहम मुद्दे आयोग के सामने रखे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद क्रूज और उसके इंजन की स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं कराई गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों में विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाती है। उनका कहना है कि क्रूज के क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने या नष्ट करने की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि क्रूज के मेंटेनेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। उनके अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट, सर्विस रिकॉर्ड और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्टों की गहन समीक्षा होनी चाहिए थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या प्रशासनिक लापरवाही के चलते।
इसके अलावा, आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि हादसे के समय एंबुलेंस तो पहुंची थी, लेकिन उसमें पर्याप्त मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। राहत और बचाव कार्यों में समन्वय की कमी भी सामने आई, जिससे कई लोगों की जान बचाने में देरी हुई।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि तत्कालीन कलेक्टर और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएं, क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत उनकी जिम्मेदारी अहम होती है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा के बिना जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं होगा।
आयोग ने अब तक कई प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। साथ ही घटनास्थल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी पूरी की जा चुकी है। आयोग ने संकेत दिया है कि शेष औपचारिकताओं के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसमें संभावित लापरवाही और जिम्मेदार पक्षों का उल्लेख किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य में जल पर्यटन और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। बरगी बांध क्षेत्र में हुई यह घटना प्रशासनिक व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, जिन पर भविष्य में सख्त सुधार की आवश्यकता है।
