वर्तमान में WhatsApp पर किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका मोबाइल नंबर आवश्यक होता है। नए Username फीचर के आने के बाद यूजर्स अपने चुने हुए यूजरनेम के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ सकेंगे। हालांकि अकाउंट बनाने और सत्यापन के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा लेकिन सामान्य बातचीत और कॉल के दौरान नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुविधा पहले से Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है और इसे प्राइवेसी बढ़ाने वाला फीचर माना जाता है।
हालांकि यही सुविधा अब चिंता का कारण भी बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर सामने नहीं आएगा और केवल यूजरनेम दिखाई देगा तो फर्जी पहचान बनाकर लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है। साइबर अपराधी किसी बैंक सरकारी विभाग या प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। इससे ऑनलाइन ठगी फिशिंग डिजिटल अरेस्ट और निवेश घोटालों जैसे मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
सरकार की सबसे बड़ी चिंता यही है कि यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। यदि अपराधी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करेंगे तो आम नागरिकों के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। इससे डिजिटल सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और साइबर अपराधों की जांच भी अधिक जटिल हो सकती है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भी इस फीचर पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल नंबर के आधार पर किसी संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंचना अपेक्षाकृत आसान होता है लेकिन केवल यूजरनेम होने पर जांच प्रक्रिया लंबी और कठिन हो सकती है। कई अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि इसी प्रकार की पहचान प्रणाली के कारण Telegram का नाम पहले भी कई साइबर अपराधों में सामने आता रहा है।
कुछ यूजर्स ने यह शिकायत भी की है कि उनके पसंदीदा यूजरनेम पहले ही किसी अन्य व्यक्ति ने सुरक्षित कर लिए हैं। इससे भविष्य में पहचान संबंधी विवाद और फर्जी अकाउंट की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में वास्तविक यूजर्स को अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखने में कठिनाई हो सकती है।
हालांकि WhatsApp का कहना है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है लेकिन भारत सरकार चाहती है कि इसके सुरक्षा पहलुओं का पूरा मूल्यांकन किया जाए। सरकार की ओर से मांगी गई सफाई के बाद ही इस फीचर के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई तकनीकें जहां सुविधाएं बढ़ाती हैं वहीं उनके साथ सुरक्षा और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में WhatsApp Username फीचर का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है।
