नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 16,जुलाई,2026(हिन्द संतरी ) मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व-सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। विकासखंड बाबई के ग्राम गनेरा की निवासी टमू केवट इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपनी आजीविका को नया आयाम दिया, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ की है। टमू केवट वर्ष 2018 में याचिका स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें 10 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड (RF) सहायता तथा 60 हजार रुपये का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने गल्ला व्यवसाय एवं सिलाई कार्य शुरू करने में किया।
समूह से जुड़ने से पहले टमू केवट गृहणी होने के साथ गांव में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करती थीं। उस समय उनकी व्यक्तिगत मासिक आय लगभग 6 हजार रुपये तथा परिवार की मासिक आय 10 से 12 हजार रुपये के बीच थी। समूह से जुड़ने के बाद उनके व्यवसाय को गति मिली और आज उनकी व्यक्तिगत मासिक आय 16 से 19 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की मासिक आय बढ़कर लगभग 28 हजार 500 रुपये हो गई है। गल्ला व्यवसाय से उन्हें प्रतिमाह 15 से 18 हजार रुपये तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। टमू केवट की सफलता यह दर्शाती है कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। उनकी यह प्रेरक कहानी अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही है।
