आत्माराम यादव चीफ एडिटर
नर्मदापुरम 20 अगस्त 2026 (हिन्द संतरी ) विजयपाल सिंह 1998 से पार्षद चुनने के बाद नगरपालिका ऊपाध्यक्ष बनने के पश्चात अपनी राजनैतिक जीवन की यात्रा का पड़ाव भाग्यश्री लाज के कार्यालय में डाल चुके थे ओर पिछले 28 वर्षों से उनका नाम लिए बिना जिले के लोग लाज का सम्बोधन करते ओर सभी समझ जाते की लाज विजय पाल जी की है जहां से उनकी राजनीति शुरू हुई ओर दिनोदिन ऊंचाइया छूती रही। वे सोहगपुर के विधायक बने तो उन्होने सोहागपुर में अपना कार्यालय चालू किया किन्तु भाग्यश्री जैसे स्वतन्त्रता ओर कार्यकर्ताओं का सम्पूर्ण समर्पण का भाव सोहागपुर में नही मिला। उन्होने 28 साल की राजनीति का तिलिस्म बनी भाग्यश्री से अचानक कैसे नाता तोड़कर इसी शहर में “लोकतीर्थ”” की उपाधि देकर नए कार्यालय की शुरुआत की है ।यह बदलाब राजनीतिस समीकरणों की नई बिछात ही समझी जा सकती है जिसमें वे पढ़े न लिखे सोहागपुर रहते लोकोक्ति से मुक्त होकर अब नर्मदापुरम को ही अपना लक्ष्य बनाने की शुरुआत कर चुके है।
चौधरी दर्शन सिंह ने जनता दरबार की शुरुआत सरकारी बंगले से की ओर नर्मदापुरम संभागीय मुख्यालय साहित भोपाल ओर दिल्ली में सरकारी बंगलों का सुख दौड़ते-भागते प्राप्त कर रहे है, जनता दरबार में सांसद ने कब ओर किस दिन सुनवाई कर अधिकारियों को जनता की समस्याओं से मुक्ति हेतु लिखा एक भी प्रमाण नहीं है। जिले में सालों से कई अधिकारी प्रभारी होकर दूसरे जिलों में भी प्रभार पर है, सांसद ने किसानों के हित में काम किया हो वह भी दिखाई नहीं देता है ओर यही स्थिति विधायक जी की है जो प्रति सोमवार अपने कार्यकर्ताओं के दलबल के साथ होते है किन्तु उनका समय कुश्ती संघ के इतर-बितर ही निकलता है अब ऐसे में सोहागपुर विधायक इनकी लीक को तोड़ने के लिए जनता दरबार का तोड़ “”लोकतीर्थ” लेकर आ गए है जहां से वे सोहागपुर विधानसभा के लोगों के संपर्क में रहेंगे वही नर्मदापुरम विधानसभा में अपनी बौनी बखरनी शुरू कर चुनाव के समय टिकिट पाकर फसल काटने को तत्पर होंगे।
भाग्यश्री तो भाग्यश्री ही रहेगी,जब भाग्यश्री के उदघाटन का फीता कटने से लेकर भाग्यढ़ी में इन 28 वर्षो तक विजयपाल के भाग्य में तिलक के हम साक्षी रहे है। अब भाग्यश्री के पीठपीछे श्रावणमास में कावड़ियों की भीड़ में “लोकतीर्थ” कार्यालय का विधि-विधान से फीता काटकर उद्घाटन होने के भले हम साक्षी नही है पर बाकी सभी तो साक्षी है। राजनीतिक गलियारों में “लोकतीर्थ” में तैतीस कोटि देवताओं का स्थापन माना जा रहा है , पर लोकतीर्थ किसी देवता या देवी का मंदिर-मठ नहीं , बल्कि बाईराम आश्रम जैसे बड़े दिव्य पुण्यआत्माओं के आश्रम की छत्रसाया में निकले आशीर्वाद का आवरण है जो इनसे प्राप्त प्रसाद के स्वरूप में नर्मदापुरम विजय की शंखनाद का स्वर है “लोकतीर्थ” जहां से विधायक विजयपाल सिंह राजनीति की बैतरनी को सहज ही पार करने को संकल्पित हुये है। भाग्यश्री लाज को भले ही विजयपालसिंह अलविदा कह आएं पर भाग्यश्री उनके मन को उनके दिल में बसी राजनीति हो या कोई भी नीति जिसकी साक्षी भाग्यश्री लाज के सारे कक्ष, सारे हाल रहे है को खामोशी से संभालकर रखेगी, जैसे भाग्यश्री गोदामों-डंफ़रों पर अंकित भाग्यश्री, इनके भाग्य को श्री से विभूतित किए है।
