छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच...
कविता
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार, मगर पड़ोसी से नहीं, पहले जैसा प्यार॥ मोबाइल की...
भया अहमदाबाद में,मोदी के मैदान। टी ट्वेंटी का फाईनल, जीता हिन्दुस्तान।। टी ट्वेंटी की सुनो कहानी। भारत...
“”पानी रे पानी……. हम बूंद-बूंद कूं तरसैगे।”” दूधिया भौर भये पैज्यों, लेउ दूध की टेर लगावत...
“जड़ें ना खोदें अपनी!” जैसे -जैसे प्रगति की ओर है अग्रसर मानव अपनी इतिहासिक धरोहरों को भूल...
धृतराष्ट्रों की महासभा में, अरावली का चीरहरण है। हार नहीं मानी मुगलों से बन हल्दीघाटी यही लड़ी...
दोहे (शीत-ऋतु) ****** ठिठुरन, थरथर कँपकँपी, हमें दे रही ठंड। मौसम धर्म निभा रहा,नियमित-सतत अखंड। ऋतुएँ नियम...
रो पड़ा ख़ुद भी खुदा… रो पड़ा ख़ुद भी खुदा ये देखकर l बेखबर था आदमी का...
नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार समय-समय पर होने वाला शनि का परिवर्तन मानव जीवन पर गहरा...
