इस घटनाक्रम पर टीवी अभिनेत्री और राजनीतिक रूप से सक्रिय रूपाली गांगुली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस फैसले को लेकर गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि जिस देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, वहां वास्तविक जीवन में उनके अधिकारों को लेकर अभी भी संघर्ष जारी है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक विफलता नहीं बल्कि सामाजिक असमानता का संकेत बताया।
अपने संदेश में रूपाली गांगुली ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य संसद और अन्य संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया में समानता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से इस विषय पर चर्चा होती रही है लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने वाली सोच को दर्शाती है।
उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात तो अक्सर की जाती है लेकिन जब वास्तविक अवसर देने की बात आती है तो बाधाएं सामने आ जाती हैं। उनके अनुसार यह केवल एक कानून का मामला नहीं बल्कि सोच और व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी किसी एक वर्ग या समूह का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज के विकास से जुड़ा हुआ प्रश्न है।
रूपाली गांगुली ने अपने संदेश में अपने लोकप्रिय धारावाहिक का संदर्भ देते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को अक्सर सीमित भूमिकाओं में देखने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने कहा कि वास्तविक जीवन में भी कई बार महिलाओं को यही संदेश दिया जाता है कि उनकी भूमिका सीमित है, जो बदलने की आवश्यकता है।
इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक बड़ा अवसर मानते हैं, जबकि कुछ इसे संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर देश में व्यापक सहमति अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
