उस समय डैनी फिल्म जगत में एक उभरते हुए कलाकार थे और किशोर कुमार जैसे महान गायक का बुलावा पाकर वह काफी घबरा गए थे। जब डैनी उनके घर पहुंचे, तो किशोर कुमार ने उनके सामने एक अजीब सी फरमाइश रख दी। उन्होंने डैनी से कहा कि वह उन्हें अपनी आवाज में कुछ नेपाली और असमी लोकगीत सुनाएं। डैनी काफी हैरान थे कि आखिर एक महान गायक उनसे गाने क्यों सुनना चाहता है, लेकिन उन्होंने हिचकते हुए किशोर दा को अपनी मातृभाषा के कुछ पारंपरिक गीत सुनाए। डैनी वहां से यह सोचकर चले गए कि शायद किशोर दा महज मनोरंजन के लिए गाने सुन रहे थे, लेकिन असल में उस महान कलाकार के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।
दरअसल, किशोर कुमार केवल गाने नहीं सुन रहे थे, बल्कि वह डैनी की आवाज की बनावट, उनके चेहरे के हाव-भाव, गाना गाते समय उनके गले की हरकतों और उनके उच्चारण के लहजे को बहुत गहराई से समझ रहे थे। डैनी के जाने के बाद किशोर कुमार ने कई अन्य नेपाली और ट्राइबल गीतों का अध्ययन किया ताकि वह डैनी की आवाज के करीब पहुंच सकें। इसी कड़ी मेहनत का परिणाम था फिल्म का सुपरहिट गाना ‘तू लाली है सवेरे वाली’। जब यह गाना रिलीज हुआ, तो लोग अपनी कानों पर यकीन नहीं कर पाए। पर्दे पर डैनी को लिप-सिंकिंग करते देख ऐसा लग रहा था मानो वह खुद गा रहे हों। किशोर कुमार ने अपनी मूल आवाज को इस तरह बदला था कि उसमें डैनी का व्यक्तित्व पूरी तरह समा गया था।
इतिहास गवाह है कि यह गाना न केवल उस समय हिट हुआ बल्कि आज भी किशोर कुमार के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है। डैनी खुद भी बाद में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि किशोर दा की उस लगन ने उन्हें अचंभित कर दिया था। इसके बाद किशोर कुमार ने डैनी के लिए एक बंगाली गाना भी गाया, जिसमें फिर से वही जादू देखने को मिला। किशोर कुमार का यह अंदाज साबित करता है कि वह महज एक गायक नहीं बल्कि एक बेहतरीन अभिनेता भी थे, जो माइक के पीछे रहकर पर्दे पर दिखने वाले कलाकार की आत्मा को अपनी आवाज में उतार लेते थे। भले ही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन डैनी और किशोर कुमार का यह अनूठा संगम संगीत प्रेमियों के लिए हमेशा एक अनमोल धरोहर बना रहेगा।
