-आत्माराम यादव पीव चीफ एडिटर हिन्द संतरी
बीजेपी देश में सर्वव्यापी हो इसलिए बीजेपी ने पहले अपने नेता मोदी जी को सर्वव्यापी बनाने के लिए एक लोकप्रिय नारा चलाया “हर हर मोदी, घर घर मोदी”, बस देश में परिवर्तन की आँधी आई ओर हर व्यक्ति मोदी होने लगा। देखते ही देखते घर-घर में मोदी ही मोदी हो गए। ठीक वैसे ही जैसे ईश्वर सर्वव्यापी है इसी मूलमंत्र को साधते हुये बीजेपी में मोदी जी सर्वव्यापी हो गए ओर बीजेपी के आधारस्तम्भ सर्वज्ञ रहे लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी अपने अपने घरों की सीमाओं में व्याप्त कर दिये गए। मोदी जी सरकार में आने के बाद सर्वाधिक विदेश यात्रा करने वाले विश्वव्यापी हो गए। मोदी जी के खाते में प्रमुख उपलब्धि के रूप में उनके तीसरे कार्यकाल में बतौर निर्वाचित प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सबसे लंबे कार्यकाल को पार करना है भले उन्होने देश को जो दिया उसमें मोदी जी के नंबर कम हो इसकी बात को दबाने के लिए उनका पक्ष भारत को चौथी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाना, डिजिटल इंडिया व यूपीआई क्रांति का विस्तार करना, और ‘विकसित भारत’ के विजन के तहत व्यापक स्तर पर बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) परियोजनाओं का विकास उनकी सरकार की बड़ी सफलताएं हैं, जिसमे मोदी जी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हाल ही में 17 जून को फ्रांस में आयोजित जी -7 शिखर सम्मेलन में हुई चर्चा कितनी बेहतर ओर सार्थक होगी यह भविष्य के गर्भ में है। मोदी जी सकल ब्रम्हान्ड में छाए है, अगर संसार के सारे पेन-कलम दबात ओर बुद्धिजीवी, कलमजीवी,साहित्यजीवी या परजीवी सभी मोदी जी के चरित्र को लिखने बैठे तो यह जन्म उनके लिए कम होगा पर शुरुआत तो होनी ही चाहिए इसलिए शुरुआत कर रहा हूँ ।
बीजेपी की कथनी करनी ओर चरित्र पर दृष्टि डाले तो मध्यप्रदेश में 2013 में भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा परीक्षा घोटाला यानी व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) सामने आया. जिसमें तत्कालीन भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक और क्रिस्प के चेयरमैन डॉ. सुधीर शर्मा 4000 करोड़ की संपत्ति क पकड़े गए, शेष मुन्नाभाइयों की लिस्ट ओर भ्रष्टाचार की राशि करोड़ो में है। यानि बीजेपी में घोटालों की छूट एक वरदान के रूप में मिली थी जैसे भगवान शिवजी ने भस्मासुर को वरदान दिया था की जिसके भी सिर पर हाथ रखोगे वह भस्म हो जाएगा? पर बीजेपी में नेता भस्म नहीं हुये वल्लभ भवन ,सतपुड़ा भवन की फाइलें भस्म होती गई। कालांतर में मोदी जी के सोये हुये पुण्यों का उदय हुआ तो उन्हे सहज ही वह शक्ति प्राप्त हो गई की जो भी उनके फेंकूँ भाषण सुनेगा वह सम्मोहित हो जाएगा ओर उसका रोम-रोम मोदी-मोदी का जाप करने लगेगा। परिणाम सामने है विपक्ष के सारे दल जिसमें भले एक व्यक्ति दल हो या बहुव्यक्ति दल, कैसा भी नया पुराना दल हो, बस दल को दलदल करने का हुनर मोदी जी के झूठ में है, उनके जुमलेवजी में । उनका एक इशारा हुआ की मध्यप्रदेश में सरकार चला रहे नामी-गिरामी राजा- महाराजा मंत्री-विधायक तक बरसाती नालों की तरह ओव्हरफ़्लो हो शिवराज के मायाजाल ओर मोदी के तिलिश्म में समा गए। डालर के मुक़ाबले देश का रुपया ओर साख जितनी मोदी जी की कार्यकाल में गिरती गई, उसके पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था ।
नागनाथ सांपनाथ की तरह कांग्रेस ओर बीजेपी एक दूसरे को फुफकार रहे थे शिवराज जी का काला कारनामा उजागर न हो इसके पूर्व जून 2023 मे सतपुड़ा में आगजनी हुई ओर स्वास्थ्य विभाग, कोविड से जुड़े भुगतान, और नर्सिंग कॉलेज घोटाले से जुड़ी 12,000 महत्वपूर्ण फाइलें और 25 करोड़ रुपये का फर्नीचर स्वाहा हो गया दूसरे रही सही पोलपट्टी की पोल का खोल वल्लभ भवन से बाहर न निकल पाये मार्च 2024 में वल्लभ भवन के 45 कमरों में आग चुन चुनकर सिर्फ जरूरी फाइलों ओर रिकार्ड का भक्षण कर गई। बस जनता जाये भाड़ में, करोड़ो रुपए की संपत्ति ओर रिकार्ड जलने के बाद सरकार का नुकसान हुआ जिसकी भरपाई करने के लिए प्रदेश की जनता लघोर गाय है, जनतारूपी गाय को दुहा गया ओर पाँव पाँव वाले भैया नेता शिवराज अपनी लाडिली बहनों के लिए उड़नखटोले में बैठे बैठे ही अपना ओर बीजेपी के भविष्य एवं चरित्र को उज्ज्वल सनलाइट साबुन की सफेदी की झंकार से धोकर। स्याह सफ़ेद सफेदी की झंकार से चमकने लगे। हो गया था। व्यापम का जिन्न बीजेपी को डस चुका था कोस रहे थे अमृत के वितरण के समय जैसे विश्वमोहनी आई थी उसके सौन्दर्य पर मर मिटने वाले देवताओं को कौन भूला है, कमलनाथ को छोड़ कमल पर फिदा होने वाले कांग्रेसियों को जैसे शिवराज ने सफेदी की झंकार में सफ़ेद चमकाने के लिए रामदेव बाबा द्वारा लाखों साल से हिमालय में छिपे शिलाजीत –अश्वगंधा को पेटियों मे भर-भर कर दिया ओर खिलाकर युवा-ताकतवर बना दिया, वह भोग वशीभूत करने के लिए था, पर वशीभूत हुये नेताओं को भूत बनाकर वश में कर लिए गया , उनकी जुबान से इसका स्वाद जाता नहीं ओर दुबारा वे किसी योग्य नहीं रहे, समय निकलने के बाद वे कांग्रेसी आडवाणी जैसे मढ़ दिये गए।
मोदी जी के मध्यप्रदेश में उनके सिपहसलाहकार रहे एवं वर्तमान में मोदी सरकार के संगी मंत्री शिवराज का प्रसंग स्मरण आता है जब वे मध्यप्रदेश में अपना बहुमत खोकर जुगाडु सरकार बनाने के लिए षड्यंत्र कहिए या युक्ति कहिए शिवराज ने कांग्रेस को जो शिलाजीत अश्वगंधा दिया वह उर्वशी-रंभा जैसा ही था, जिसे खूनी पंजा बताया शिवराज ने उनके हाथों में कमल थमाकर खुद की सरकार बना ली मतलब आप पावरफूल हो गए। कमलनाथ का पावर छिनकर खुद पावरस्टेशन बनने का काम शिवराज जैसे अनेक प्रदेशों में इस्तेमाल किया गया। जो मोदी के पावरस्टेशन है वे मोदी चवनप्राश लेने के आदि है ओर जो पावरस्टेशनों के स्विच है वे मोदी चूर्ण पाकर सक्रिय होती है। मोदी चूर्ण पचाने का काम करती है, मोदी जी कहा करते है की न खाऊँगा ओर न खाने दूंगा,पर खाता कौन कमबख्त है? खाने के लिए कोमल हाथ की उंगलिया है पर मुह सुरसा का हो तो उसमें उँगलियों का क्या काम ? सुरसा के मुख में तो आदमी की बात छोड़िए गाँव, शहर, प्रदेश ओर देश सब समा जाते है,जिसे पचाने के लिए मोदी चूर्ण हैं, जिसमें झूठ ओर फेंकी गई बातें भी आसानी से पच जाती है। मोदी चूर्ण नीरव मोदी, अंबानी सहित वे लोग जो करोड़ो अरबों के घोटालेवाज है उनके लिए है, बाकी को मोदी चूर्ण देने का जुमला ही काफी है। हर सप्ताह मोदी जी के भाषण सुनने से यह भाषण मोदी चूर्ण का काम करता है, इसलिए प्रदेश से लेकर जिलों तक के छोटे बड़े सारे नेता टीवी के सामने मोदी जी के भाषण सुनते हुये सेल्फी लेकर सोसलमीडिया के माध्यम से इत्तिला दे देते है की हमारी भक्ति में कोई कमी नहीं है। लेकिन आशंकाओं से ग्रस्त मोदी भक्त अपच महसूस करते हुये मोदीचूर्ण की चाहत रखते है ताकि अफसरों-नेताओं के साथ मिलकर जो भी खायो उसे पचा सके।
जिस प्रकार कोरोना काल में रेमडेसिवीर जैसे एंटी-वायरल इंजेक्शन के अभाव मे लोग मर रहे थे तब मोदी सरकार के नियंत्रण में इसका वितरण हुआ ठीक वैसे ही बीजेपी में निष्ठा साबित करने के लिए बड़े कार्यकर्ताओं में मोदी चूर्ण की अफरा-तफरी और लंबी कतारें हैं ताकि वे इससे सभी ताकतों से सुरक्षित रहे ओर भूलकर भी ईडी, सीआईडी, बीएसएफ, आईबी उनके घरों- कारखानों गोदामों में छापेमारी न कर सके। मोदी जी की मूल ताकत यही सारी एजेंसियां है जिसे विपक्षियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है पर जुमलेवाजी की झूठ ओर फेंकूपन कब बीजेपी की मूल ताकत रहे उनके कार्यकर्ता-नेता पर गाज बनकर गिर पड़े, इसकी चिंता में बैंको का पैसा लेकर देश से भागे भगोड़ों को नहीं बल्कि बीजेपी की धूल से फूल बने, फूल से फुलवारी बने ओर फुलवारी से गार्डन बने बीजेपी नेताओं को ज्यादा सता रही है। आखिर सताये क्यो नहीं? मोदी जी पर भाग्य बलवान है, जो भी मोदी जी से मिलता है मिलने वाले की आधी ताकत मोदी जी में समा जाती है, बस आधी ताकत के होते ही उसे छिन्न-भिन्न करने में कोई अस्त्र शस्त्र नहीं बल्कि एक जुमला काफी होता है, जुमले के बाद मोदी से मिलने वाला मोदीमय हो जाता है।
मोदी युग के 12 साल बाद अवतारी मोदी जी खुद महंगाई पर कभी कुछ बोलते नहीं आज जबकि महंगाई आत्महंता बनी है तब मोदी जी महगाई कम करने की बजाए देश कि महिलाओं को सोने चांदी के आभूषण न खरीदने, देशवासियों से पेट्रोल न खरीदने कि अपील करते है पर खुद मोदी ओर उनकी सरकार पर खुलेआम जीत के बाद अपनी पार्टी से गद्दारी करके मोदी की शरण के लिए इन सांसद विधायको को खरीदने कि चर्चा पर वे चुप्पी साधे रहते है, मतलब साफ है जिनके सांसद विधायक खरीदे वे तो उनकी पार्टी के बिकाऊ अवसरवादी नेताओं को नंगा करेंगे ही। बहुमत होने के बाद उनकी सरकार बनाने के अवसरों को छिनना ओर अपनी सरकार बनाना यह महाअंधेर मोदी युग में हुआ है। मोदीयुग की इस महाभारत में एक से एक अनहोनी घटनाओं ने जन्म लिया, जिस नोटबंदी को मोदी जी ने एतिहासिक बताकर कालेधन वापिस लाने की बात की वह देशवासियों को खून के आँसू रुला गई पर काला धन वापिस आने की बजाय काले धन को सफ़ेद धन होते देखा गया। इस चमत्कारिक मोदी युग में जिसने भी भारत में जन्म लिया है उस भारतवासी ने न मोदी जी को समझा ओर न ही उनके अफसरों को, इन्हे समझने के लिए सभी को इस जन्म में मरना होगा ओर कई जन्म लेने पड़ेंगे? तब हो सकता है किसी जन्म में उन्हे मोदी जी समझ मेँ आ सके?
किन्तु इस देश में हम जैसे कुछ अतिसौभागीशाली लोग भी पाए जाते है जो उड़ती चिड़िया के पर गिन लेते है फिर मोदी जी या उनकी सरकार उनके आफिसर ओर अन्य हमसे कैसे बच सकते है। इसलिए मोदी जी या उनके युग को समझने के लिए हमें दूसरा जन्म लेने की आवश्यकता नहीं है। दूसरे वे लोग भी है जो ज्ञानी- वैरागी, ढोंगी-त्यागी झूठे-कपटी आदि आदि जनसमुदाय में शामिल लोग मोदी जी को समझने का जगत ढिंढोरा पीटते हुये मोदी च्वनप्राश या मोदी चूर्ण का स्वाद चखे बिना मोदीमय हो गए है, यानि भक्ति की पराकाष्ठा को पार कर गए है, ओर हर घर मोदी ,घर घर मोदी के नारे के बाद खुद को मोदी समझने- मानने लगे है? ओर खुद को मोदी मानते समझते हुये खुद मोदी सी फिलिंग मेँ जीने के आदि हो गए है वे तमाम अफसरों पर मोदी का रुआब झाड़ते हुये मोदी से गुण ओर शक्तियों से भरा पाकर अफसरों को झुका ले तो यह मोदीभक्त की अवसरवादिता को भुनाना हुआ ओर अफसर का अवसर खोजकर अवसर की त्रिवेणी मेँ स्नान करना हुआ। मोदी जी पर संविधान बदलने, अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुचाने,अमेरिका के दबाव में सीजफायर की घोषणा में जल्दवाजी कर भारत की अंतरराष्ट्रीय साख को नुकसान पहुंचाने, विदेश नीति की असफलता तथा अन्य गंभीर मामलों जिसमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हिंसा,मणिपुर में जारी अस्थिरता के लिए कठघरे में खड़ा किया किन्तु उनका जबाव देने की बजाय मोदी जी अपनी उपलब्धियों का ढोल पीटने में अग्रणी रहे।
मोदी जी के शासनकाल में पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा बनाई ओर सहेजी गई एयरलाइन कंपनी ‘एयर इंडिया’ का पूर्ण निजीकरण करके इसे टाटा समूह को सौंपने, रेलवे स्टेशनों, राजमार्गों, और बिजली ग्रिड जैसे बुनियादी ढांचों को निजी कंपनियों को लीज पर देकर राजस्व जुटाने का काम कर बंटाढार किया है । जिन सरकारी संस्थाओं में छोटे-बडे हजारो पद खाली है उसकी आपूर्ति हेतु शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार न देना 5 करोड़ रोजगार देने का आश्वासन भी हवा हवाई हो गया। अलबता आर्थिक अपराधों, विदेशी मुद्रा उल्लंघन (FEMA) और मनी लॉन्ड्रिंग (काला धन सफेद करना) के मामलों में कार्रवाई करने वाली एजेसी ईडी, देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई जो बड़े भ्रष्टाचार, घोटालों, हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच करती है, इन्कम टेक्स विभाग चुनाव आयोग एवं सुप्रीम कौर्ट जैसी शक्तिशाली एजेंसियों का रिमोर्ट अपने हाथ में रखकर कांग्रेस, सपा, बसपा, तृणमूल,शिवसेना जैसे महादल कि जड़ को खोखला कर पंजा अपने पाले में कर फूल थमा रखा है। इन दलों के सांसद- विधायक तक मोदी के प्रभाव से अपनी पार्टी के हरे भरे वृक्ष से सूखे पत्ते की तरह फूल पर समर्पित है, इसलिए विश्व भी मोदी का लोहा मानता है । कलिकाल में सनातन धर्म का घण्टा बजाने वाले प्रजापालक मोदी जी को सभी विपक्षी कोसते है ओर कहते है कि उनकी महाझूठी सरकार से ओर उनके सारे आफ़िसरों से भगवान भी नहीं बचा सकता है, हा अगर कोई बचा सकता है तो वो खुद मोदी है ओर मोदी कही ओर नहीं हर घर में मिल जाएँगे।
हाल ही में बंगाल से चुनाव हारी तृणमूल कांग्रेस कि ममता जी हो या काकरोच पार्टी जैसे नोसीखिए आयातित नेता वे सभी मोदी जी ओर उनकी सरकार, उनकी पार्टी ओर सरकार के सारे अफसरों को अवसरवादी बताते है ओर सरकार में बैठी बीजेपी सहित उनके हर छोटे- बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी ओर शासन-प्रशासन में बैठे सभी अधिकारी-कर्मचारी ऐनकेन योजनाओं के कार्यान्वयन में फर्जीवाड़ा कर आर्थिक अनियमितताओं के एक से एक सुनहरे अवसरों को पैदा कर अवसरों को पूर्णतया दुहते है उन तमाम अवसरवादी अफसरों की सर्वव्यापकता ईश्वर की तरह होने से सभी इन्हे अपना ईश्वर स्वीकारते है। मूर्तिकार पत्थर को तराशकर मूर्ति को जन्म देकर पूजनीय बना देता है आज देश के करोड़ों युवाओं को रोजगार का सपना दिखाकर उन्हे आशा के खूबसूरत सरोबर में स्विमिंग का मजा लूटने की आजादी देने वाले इस अवतारी नेता मोदी जी ओर उनकी पूरी सरकार व आफिसर ईश्वर का मानवीय संस्करण के रूप में मौजूद है, यानि ये सभी ईश्वर का ही दूसरा रूप है
आत्माराम यादव पीव वरिष्ठ पत्रकार
श्रीजगन्नाथधाम काली मंदिर के पीछे,
ग्वालटोली नर्मदापुरम मध्यप्रदेश मोबाइल- 9993376616
