हिन्द संतरी डेस्क/नीलेश यादव
भोपाल 22 अगस्त 2026, (हिन्द संतरी ) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के गौरव, हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक एवं व्यंग्यकार स्व. हरिशंकर परसाई की जयंती पर उन्हें नमन किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक्स’ पर कहा कि ‘भोलाराम का जीव’, ‘सदाचार का ताबीज’ और ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ जैसी कालजयी रचनाओं के माध्यम से स्व. परसाई ने समाज की विसंगतियों, रूढ़ियों और पाखंड पर तीखा प्रहार किया। उनकी निर्भीक लेखनी आज भी समाज को सजग दृष्टि, आत्ममंथन और सत्य के पक्ष में खड़े होने की प्रेरणा देती है। उल्लेखनीय है कि स्व. हरिशंकर परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 को नर्मदापुरम (मध्य्प्रदेश) जिले में हुआ था।
मुख्यमंत्री के अनुसार एक स्तंभ लेखक के रूप में समय और समाज पर परसाई की गहरी नज़र तत्कालीन संवेदना को तो आकार देती ही रही, बदलते दौर के साथ समसामयिक विमर्श में भी मूल्यवान बनी रही है। सोशल मीडिया के नए युग में भी वह सबसे लोकप्रिय और उद्धृत किए जाते हिंदी लेखकों में शामिल हैं।
बक़ौल कमला प्रसाद, “जनभाषा में एक कवि कबीर है, जिसने राह के बटमारों की गतिविधियों को ख़ूब पहचाना। उसने जासूसी की। कपट को पारदर्शी आँखों से चीरने का काम उसने जीवनपर्यंत किया। ऐसा ही दूसरा लेखक उसकी बिरादरी में हुआ परसाई।”
हरिशंकर परसाई ने व्यंग्य-लेख और निबंध के साथ ही कहानी, उपन्यास, संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज आदि विधाओं में भी योगदान किया है और इन विधाओं में भी चिह्नित किए जाते हैं। उन्हें उनकी कृति ‘विकलांग श्रद्धा का दौर’ के लिए साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्रमुख कृतियाँ :-
निबंध-संग्रह :- तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेईमानी की परत, पगडंडियों का ज़माना, शिकायत मुझे भी है, सदाचार का तावीज़, और अंत में, प्रेमचंद के फटे जूते, माटी कहे कुम्हार से, काग भगोड़ा।
कहानी-संग्रह :- हँसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे, भोलाराम का जीव, दो नाक वाले लोग
उपन्यास :- रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज, ज्वाला और जल।
व्यंग्य-लेख संग्रह :- वैष्णव की फिसलन, ठिठुरता हुआ गणतंत्र, विकलांग श्रद्धा का दौरा।
संस्मरण :- तिरछी रेखाएँ।
इसके अतिरिक्त, ‘परसाई रचनावली’ के छह खंडों में उनके समग्र साहित्य का संकलन किया गया है।
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