प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।
प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।
इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
