दोपहिया और तिपहिया में भी शानदार प्रदर्शन
ऑटो सेक्टर के अन्य सेगमेंट्स में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मार्च में दोपहिया वाहनों की बिक्री 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19,76,128 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले साल यह 16,56,939 यूनिट्स थी। वहीं तिपहिया वाहनों की बिक्री में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 76,273 यूनिट्स तक पहुंच गई। इन आंकड़ों से साफ है कि शहरी ही नहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में भी मांग मजबूत बनी हुई है।
डीलरशिप स्टॉक और मांग बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी के पीछे दो मुख्य कारण रहे—एक, डीलरों के पास पर्याप्त इन्वेंट्री उपलब्ध होना और दूसरा, ग्राहकों की बढ़ती मांग। फरवरी महीने में भी यात्री वाहनों की बिक्री में 10.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो इस सकारात्मक ट्रेंड को और मजबूत करती है।
आने वाले समय के संकेत भी सकारात्मक
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ऑटो सेक्टर की थोक बिक्री 7 से 9 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। इसके पीछे त्योहारों की मजबूत मांग, हाल में जीएसटी दरों में कटौती और नए मॉडलों की लॉन्चिंग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में उच्च आधार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के चलते वृद्धि दर घटकर 4 से 6 प्रतिशत रह सकती है।
SUV और प्रीमियम कारों का बढ़ता क्रेज
ऑटो इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है। अब ग्राहकों का झुकाव यूटिलिटी व्हीकल (SUV) और प्रीमियम सेगमेंट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कुल यात्री वाहन बिक्री में SUV की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत हो गई है, जो यह दिखाती है कि लोग अब ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी
सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बाजार में विविधता आई है और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
ऑटो सेक्टर में जारी है बदलाव का दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ऑटो बाजार अब एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है, जहां पारंपरिक वाहनों के साथ-साथ नए फ्यूल और टेक्नोलॉजी आधारित विकल्प तेजी से जगह बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और स्पष्ट नजर आएगा।
