सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। इनमें वाहनों के प्रदर्शन, इंजन की कार्यक्षमता और माइलेज पर संभावित प्रभाव को लेकर कई दावे सामने आए थे। सरकार ने कहा कि वर्तमान में उपयोग किया जा रहा ई-20 पेट्रोल लंबे समय तक परीक्षण और मूल्यांकन के बाद ही चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, इसलिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
सरकारी जानकारी के अनुसार देश में करोड़ों दोपहिया और लाखों पेट्रोल आधारित चारपहिया वाहन पहले से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को धीरे-धीरे लागू किया गया ताकि वाहन निर्माता कंपनियां, ईंधन आपूर्ति व्यवस्था और उपभोक्ता सभी इसके अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और वैज्ञानिक मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया है।
हाल ही में सरकार ने एथेनॉल मिश्रण से जुड़े कई प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी किया था। इसमें कहा गया कि ई-20 पेट्रोल किसी प्रयोगात्मक ईंधन की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि इसके पीछे व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, सुरक्षा परीक्षण और नियामकीय मानकों का पालन किया गया है। सरकार के अनुसार दुनिया के अनेक देशों में दशकों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है और भारत ने भी उसी अनुभव के आधार पर अपनी नीति तैयार की है।
सरकार ने एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत संबंधी दावों को भी भ्रामक बताया है। अधिकारियों के अनुसार आधुनिक एथेनॉल डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए सीमित मात्रा में प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है तथा अधिकांश इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है। इससे पानी का पुनर्चक्रण संभव हो रहा है और जल संसाधनों पर दबाव कम पड़ता है।
सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अब केवल अतिरिक्त खाद्यान्न पर निर्भरता नहीं है। मक्का आधारित एथेनॉल उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है और वर्तमान आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी स्रोत से आ रहा है। मक्का की खेती में अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित अन्य नीतिगत कदम भी उठाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है। सरकार ने दोहराया है कि ईंधन नीति से जुड़ा हर अगला निर्णय वैज्ञानिक प्रमाण, तकनीकी परीक्षण और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा। फिलहाल देश में ई-20 कार्यक्रम निर्धारित नीति के अनुसार जारी रहेगा और ई-25 को लेकर कोई तत्काल योजना नहीं है।
