नए नियमों के अनुसार अब कर्मचारियों के साथ उनके परिवार और आश्रितों की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। इसमें गोद लिए गए बच्चे सौतेले बच्चे और ऐसे लोग भी शामिल होंगे जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इससे अब निवेश और सेवा संबंधी नियमों का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो जाएगा और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की संभावना पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।
सेबी ने कर्मचारियों के निवेश नियमों में सबसे बड़ा बदलाव किया है। अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव उत्पादों में नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि म्यूचुअल फंड रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी रीट्स और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश योजनाओं में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। इसके साथ ही ऐसे निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है जो किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को छूट भी दी गई है। इनमें जीवनसाथी को मिलने वाले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के माध्यम से किए गए निवेश शामिल हैं। सेबी का मानना है कि इन प्रावधानों से कर्मचारियों की निष्पक्षता बनी रहेगी और बाजार से जुड़े संवेदनशील निर्णयों पर किसी प्रकार का निजी प्रभाव नहीं पड़ेगा।
संशोधित नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या सेवानिवृत्त होता है तो उस पर दो वर्ष का कूलिंग ऑफ पीरियड लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान वह किसी भी व्यक्ति कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी मामले में पैरवी नहीं कर सकेगा। यह प्रतिबंध जांच सुनवाई सेटलमेंट और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े मामलों पर भी लागू रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा के दौरान प्राप्त गोपनीय जानकारी का निजी लाभ के लिए उपयोग न किया जा सके।
नौकरी बदलने से जुड़े नियमों को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य संस्था या कंपनी में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा। इससे संभावित हितों के टकराव की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
सेबी ने उपहार स्वीकार करने के नियमों में भी संशोधन किया है। अब कर्मचारियों को 50 हजार रुपए तक के उपहार की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी जबकि पहले यह सीमा 10 हजार रुपए थी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले कौन से उपहार नियमों के अनुरूप स्वीकार किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी के ये नए नियम नियामकीय संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे न केवल कर्मचारियों के आचरण पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी और मजबूत होगा। बदलते वित्तीय माहौल में यह पहल भारतीय पूंजी बाजार की विश्वसनीयता को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
