नई दिल्ली:महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी राजनीतिक बहस अब और अधिक तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर असंगत और विरोधाभासी रुख अपनाया है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक भ्रम की स्थिति बनी है।
स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की महिलाओं के अधिकारों को लेकर जो चर्चा की जा रही है, उसमें विपक्ष का रवैया जमीनी वास्तविकताओं से अलग दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अपेक्षित कार्य नहीं कर पाई। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं है बल्कि यह महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक अधिकार देना है, जिससे वे देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसने इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा है, जबकि यह सामाजिक सुधार से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतियों को जमीन पर लागू करना अधिक महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर रवि शंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखता। उनके अनुसार संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्वितरण परिसीमन के माध्यम से ही संभव है और यह जनसंख्या के आधार पर तय होता है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक प्रक्रिया है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह दोनों प्रक्रियाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग करके देखना व्यावहारिक नहीं होगा।
रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि विपक्ष कुछ मामलों में समर्थन की बात करता है लेकिन जब संवैधानिक प्रक्रिया की बात आती है तो विरोधाभासी रुख अपनाता है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्पष्टता की कमी पैदा करती है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर आमने सामने हैं और यह बहस संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक लगातार तेज होती जा रही है।
