यादाद्रि भुवनगिरि जिले के वेलिमिनेडु गांव के निवासी कोंडे रघुपति ने अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ मिलकर वर्ष 2017 से नियमित रूप से 10 रुपये के सिक्के बचाने शुरू किए थे। परिवार का उद्देश्य एक दिन अपनी मेहनत की बचत से नई बाइक खरीदना था। वर्षों तक लगातार जमा किए गए सिक्कों की बदौलत उन्होंने लगभग 1.10 लाख रुपये की राशि तैयार कर ली और उसी से नई हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल खरीदने का फैसला किया।
जब रघुपति सिक्कों से भरे कई बैग लेकर मोटरसाइकिल शोरूम पहुंचे तो वहां मौजूद कर्मचारी पहले कुछ हैरान रह गए। इतनी बड़ी रकम पूरी तरह सिक्कों में मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी। हालांकि रघुपति ने पहले ही शोरूम प्रबंधन को अपनी योजना की जानकारी दे दी थी। उनकी लगन और वर्षों की मेहनत को देखते हुए शोरूम संचालक ने भुगतान स्वीकार करने का निर्णय लिया।
इसके बाद शोरूम में सिक्कों की गिनती का लंबा सिलसिला शुरू हुआ। कर्मचारियों ने सभी सिक्कों को फर्श पर फैलाकर उनकी गिनती और सत्यापन किया। करीब पांच कर्मचारियों ने लगभग चार घंटे तक लगातार मेहनत कर पूरी राशि की जांच की। गिनती पूरी होने के बाद भुगतान स्वीकार किया गया और खरीद प्रक्रिया पूरी कर रघुपति को उनकी नई मोटरसाइकिल सौंप दी गई।
रघुपति का कहना है कि उन्होंने कभी 10 रुपये के सिक्कों को लेकर फैली अफवाहों पर ध्यान नहीं दिया। कई बार लोगों के बीच यह भ्रम फैलाया जाता रहा कि ऐसे सिक्के स्वीकार नहीं किए जाते, लेकिन उन्हें भरोसा था कि यह पूरी तरह वैध मुद्रा है और एक दिन उनकी बचत उनके सपने को पूरा करेगी। इसी विश्वास के साथ परिवार ने कई वर्षों तक नियमित बचत जारी रखी।
यह घटना केवल एक बाइक खरीदने की कहानी नहीं बल्कि अनुशासित बचत और धैर्य का संदेश भी देती है। आर्थिक विशेषज्ञ भी लंबे समय से छोटी-छोटी नियमित बचत को भविष्य की बड़ी जरूरतों को पूरा करने का प्रभावी तरीका मानते रहे हैं। रघुपति के परिवार ने इसी सिद्धांत को व्यवहार में उतारकर दिखाया कि सीमित आय के बावजूद नियमित बचत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
इस अनोखी खरीदारी का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग परिवार की मेहनत, धैर्य और वित्तीय अनुशासन की जमकर सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे बचत की आदत अपनाने की प्रेरणा बताया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि निरंतर प्रयास और छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी उपलब्धि का आधार बन सकती है।
