इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह?
देबाशीष सामंतराय ने BJD छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर बढ़ती उपेक्षा को बताया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से दूर रखा जा रहा था और वे अपने राजनीतिक गुरु तथा BJD प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी के भीतर नौकरशाह से नेता बने वी. के. पांडियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन में उनके प्रभाव के कारण कई पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। BJD छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा “विकसित भारत” के विजन से प्रेरित होकर नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही।
BJP की रणनीति या सियासी संदेश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भी पार्टी ने BJD के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामंतराय को उम्मीदवार बनाना इस बात का संकेत है कि BJP ओडिशा में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, खासकर राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर।
उपचुनाव में जीत लगभग तय?
चुनाव आयोग ने ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 147 सदस्यों वाली विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में देबाशीष सामंतराय की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल BJD और कांग्रेस इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से भी बच सकती हैं, जिससे मुकाबला और आसान हो जाएगा।
ओडिशा की राजनीति में नया मोड़
इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इसे BJP की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
