बांग्लादेश की सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भाजपा को जीत पर बधाई देते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। पार्टी के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे दोनों पक्षों के रिश्ते और मजबूत होंगे। बीएनपी का मानना है कि नई राजनीतिक परिस्थिति से ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर नई प्रगति की संभावना जताई गई है।
तीस्ता विवाद पर ममता पर आरोप
बीएनपी ने अपने बयान में ममता बनर्जी और उनकी सरकार को तीस्ता समझौते में देरी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी का आरोप है कि पिछली राज्य सरकार के रुख के कारण यह संधि लंबे समय से अटकी हुई है। अब बीएनपी को उम्मीद है कि भाजपा सरकार केंद्र के साथ समन्वय कर इस समझौते को आगे बढ़ाएगी। उनका कहना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद तीस्ता बैराज परियोजना को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
पुराना है जल बंटवारे का मुद्दा
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 54 नदियां साझा हैं, लेकिन अब तक सिर्फ दो जल समझौते ही हो सके हैं—गंगा जल संधि और कुशियारा नदी संधि। 1996 की गंगा जल संधि के तहत फरक्का बैराज पर पानी के बंटवारे को नियंत्रित किया जाता है, हालांकि बांग्लादेश समय-समय पर कम पानी मिलने की शिकायत करता रहा है।
तीस्ता नदी को लेकर 1983 में एक अस्थायी समझौता हुआ था, जिसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में 2011 में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान नए प्रस्ताव पर चर्चा हुई, लेकिन राज्य सरकार के विरोध के चलते यह समझौता भी अधूरा रह गया।
वैचारिक अंतर के बावजूद सहयोग की उम्मीद
बीएनपी नेता हेलाल ने यह भी कहा कि भले ही बीएनपी और भाजपा के बीच वैचारिक अंतर हो, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि तीस्ता जल विवाद और द्विपक्षीय संबंध जैसे मुद्दों पर दोनों पक्ष सहयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तेजी आने की संभावना है, जिससे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है।
