गडकरी ने कहा, “एथनॉल पॉलिसी से मुझे कोई फायदा नहीं मिल रहा है। इतनी छोटी हिस्सेदारी के आधार पर किसी बड़े आर्थिक लाभ की बात करना सही नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि एथनॉल नीति उनके निजी हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
किसानों को फायदा पहुंचाने का दावा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह केवल एथनॉल ही नहीं, बल्कि वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कहा कि एथनॉल के बढ़ते उपयोग से किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथनॉल नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक शोध की प्रक्रिया के बाद लिया गया है।
परिवार की कंपनियों पर भी दी सफाई
गडकरी ने उन आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार से जुड़ी कंपनियां एथनॉल उत्पादन में शामिल हैं और इसी वजह से वह E20 पेट्रोल को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के सदस्यों की चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनकी कंपनियां एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं।
मक्के से एथनॉल उत्पादन से किसानों को लाभ का दावा
गडकरी ने कहा कि देश में एथनॉल की उपलब्धता बढ़ी है और मक्के से एथनॉल बनाने के फैसले का फायदा किसानों को मिला है। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को करीब 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई है।
उन्होंने बताया कि मक्के से एथनॉल उत्पादन का फैसला लेने से पहले मक्के की बाजार कीमत करीब 1,200 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,800 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद मक्के की कीमत बढ़कर करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।
E20 पेट्रोल पर दिया था चैलेंज
इससे पहले गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा था कि इसके कारण किसी वाहन में खराबी आने का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर किसी कार में E20 पेट्रोल से समस्या आई है तो उसका उदाहरण बताया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और इसके पीछे एक अभियान चलाया जा रहा है।
ISMA ने भी दावों को बताया गलत
भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) ने भी E20 पेट्रोल को लेकर किए जा रहे कुछ दावों को गलत और भ्रामक बताया है। संगठन ने कहा कि E20 से गाड़ियों को नुकसान, बीमा अमान्य होने या ईंधन में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत का एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, निगरानी और विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें पेट्रोलियम कंपनियों, वाहन निर्माताओं और ईंधन जांच एजेंसियों की भूमिका शामिल है।
