केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने विभिन्न वाहन निर्माताओं को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। उनके अनुसार कुछ प्रमुख ऑटो कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में कहा था कि वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में भी E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा और माइलेज में केवल तीन से पांच प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियों का यही आधिकारिक रुख है तो इसे स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं के सामने भी रखा जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कई कंपनियों के वाहन उपयोग पुस्तिका में E10 से अधिक एथनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर अलग प्रकार की सावधानियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि तकनीकी दस्तावेजों में अलग निर्देश दिए गए हैं तो सार्वजनिक मंचों पर कंपनियों के प्रतिनिधि अलग संदेश क्यों दे रहे हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए और कंपनियों को तथ्यात्मक जानकारी साझा करनी चाहिए।
केजरीवाल ने यह भी कहा कि वह अगले दिन दिल्ली के विभिन्न पेट्रोल पंपों और सर्विस सेंटरों का दौरा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि वहां उपलब्ध ईंधन और उससे संबंधित जानकारी का जायजा लिया जाएगा। उनका कहना है कि यदि वाहन मालिकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक या तकनीकी प्रभाव पड़ने की संभावना है तो उसके बारे में पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर केंद्र सरकार एथनॉल मिश्रित ईंधन कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानती है। सरकार का कहना है कि भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और एथनॉल मिश्रण बढ़ाने से कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जैव ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और घरेलू कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने का भी लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि E20 ईंधन की सफलता काफी हद तक वाहन तकनीक, निर्माता कंपनियों के दिशा-निर्देश और उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी पर निर्भर करेगी। नई तकनीक के अनुरूप तैयार वाहनों और पुराने मॉडलों की आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में वाहन मालिकों को अपने वाहन निर्माता की आधिकारिक सलाह का पालन करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या से बचा जा सके।
E20 पेट्रोल को लेकर शुरू हुई यह बहस अब केवल तकनीकी विषय तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक नीति, उपभोक्ता हित और ऊर्जा सुरक्षा से भी जुड़ गई है। आने वाले दिनों में ऑटो कंपनियों की प्रतिक्रिया और सरकार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल वाहन मालिकों की नजर इस बात पर बनी हुई है कि E20 ईंधन के व्यापक उपयोग से उनके वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज और रखरखाव पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।
