नई दिल्ली । संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर अपना आत्मविश्वास जाहिर किया है। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आरपीआई) के प्रमुख रामदास अठावले ने दावा किया है कि अब एनडीए के पास संसद में दो-तिहाई बहुमत है, जिसके आधार पर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने का रास्ता पहले की तुलना में अधिक मजबूत हो गया है।
अठावले ने कहा कि पिछले संसदीय सत्र में इन विधेयकों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका था, जिसके कारण वे पारित नहीं हो पाए। उनके अनुसार उस समय विपक्षी दलों ने एकजुट होकर संविधान संशोधन प्रस्तावों का विरोध किया था। अब राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव आया है और सरकार को पहले की तुलना में अधिक समर्थन मिलने की संभावना है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को संसद के दोनों सदनों से पारित कराया जा सकता है। उनका कहना है कि सरकार इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है और गठबंधन के सहयोगी दल भी इस दिशा में सकारात्मक भूमिका निभाएंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद में मौजूदा संख्या बल के आधार पर एनडीए पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। उन्होंने दावा किया कि कुछ दलों और सांसदों के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत तक पहुंच गया है। इसी आधार पर उन्होंने उम्मीद जताई कि संविधान संशोधन से जुड़े लंबित विधेयकों को इस बार आवश्यक समर्थन प्राप्त होगा।
अठावले ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण लागू होने से वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें संवैधानिक रूप से निर्धारित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। उनके अनुसार यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि समय-समय पर जनसंख्या और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाना आवश्यक होता है। उनका कहना था कि परिसीमन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का नियमित हिस्सा है और लंबे अंतराल के बाद इसे लागू करना आवश्यक माना जाता है ताकि प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और प्रभावी बन सके।
उन्होंने विपक्षी दलों से भी अपील की कि राष्ट्रीय महत्व के इन विधेयकों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाए। उनके अनुसार महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने और निर्वाचन व्यवस्था को अधिक संतुलित बनाने जैसे विषय व्यापक जनहित से जुड़े हैं, इसलिए इन पर सकारात्मक सहयोग मिलना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि पिछले संसदीय सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव अपेक्षित समर्थन नहीं जुटा सके थे। इसके बाद से इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अब मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्री के इस दावे ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
आगामी संसद सत्र में सरकार की रणनीति, विपक्ष का रुख और सदन में संख्या बल की वास्तविक स्थिति पर सभी की नजरें रहेंगी। यदि सरकार आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है तो महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद में निर्णायक प्रगति देखने को मिल सकती है।
