दावों के अनुसार 30 जून को आयोजित यूजीसी नेट समाजशास्त्र परीक्षा से पहले करीब 100 पन्नों की एक पीडीएफ सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफॉर्म पर साझा की गई थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि इस दस्तावेज में दिए गए लगभग 90 प्रश्न और उनके विकल्प वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते हैं। छात्रों का कहना है कि यह सामान्य अध्ययन सामग्री नहीं थी बल्कि प्रश्नपत्र से जुड़ा दस्तावेज प्रतीत होता था। इसी आधार पर पेपर लीक की आशंका जताई जा रही है।
विवाद उस समय और गहरा गया जब कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि कथित प्रश्नपत्र कई राज्यों में लाखों रुपये लेकर उपलब्ध कराया गया। दावा किया गया कि बिहार उत्तर प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में यह कथित पेपर करीब 2.25 लाख रुपये में बेचा गया। इन दावों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है लेकिन आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय और बड़ी आर्थिक लागत लगती है। ऐसे में यदि परीक्षा की गोपनीयता भंग होती है तो सबसे बड़ा नुकसान ईमानदारी से तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को उठाना पड़ता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है।
इस बीच विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे मामले को लेकर केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि लगातार सामने आ रहे परीक्षा विवादों के बावजूद छात्रों को न्याय और जवाबदेही नहीं मिल रही है। दूसरी ओर मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा बना रहे।
फिलहाल यूजीसी नेट पेपर लीक को लेकर लगाए गए आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में किसी भी दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। वहीं लाखों अभ्यर्थियों की नजर अब जांच के नतीजों और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
