प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।
प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।
सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।
प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।
