रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने उन डिजिटल सिस्टम्स में सेंध लगाई जो पेट्रोल पंपों में फ्यूल की मात्रा मापने और मॉनिटर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि कई सिस्टम इंटरनेट से जुड़े थे और उनमें पर्याप्त पासवर्ड सुरक्षा मौजूद नहीं थी, जिससे हैकर्स को घुसपैठ का मौका मिला।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में डिस्प्ले स्क्रीन पर दिखने वाले डेटा से छेड़छाड़ की गई, लेकिन फ्यूल की वास्तविक मात्रा या सप्लाई सिस्टम को प्रभावित नहीं किया जा सका। फिलहाल किसी बड़े हादसे या नुकसान की सूचना नहीं है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया जाए तो गैस लीक, आग या बड़े औद्योगिक हादसों जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इस घटना को अमेरिकी ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
जांच एजेंसियां इस मामले को अमेरिका-ईरान तनाव के मौजूदा दौर से भी जोड़कर देख रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित साइबर समूह पहले भी तेल, गैस, पानी और मेडिकल सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ईरानी साइबर नेटवर्क की तकनीकी क्षमता काफी बढ़ी है और वे अब पारंपरिक युद्ध के बजाय साइबर हमलों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
अमेरिका के कई पेट्रोल पंपों के फ्यूल मॉनिटरिंग सिस्टम में साइबर घुसपैठ का मामला सामने आया है, जिसमें जांच एजेंसियों को ईरान समर्थित हैकर्स पर शक है।
हालांकि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की ऊर्जा और साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
