ऊर्जा और स्वच्छ वायु पर शोध करने वाली संस्था की रिपोर्ट के अनुसार जून महीने में भारत के कुल रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का रहा। कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी हाइड्रोकार्बन आयात में 83 प्रतिशत हिस्सेदारी केवल कच्चे तेल की रही, जिसकी कीमत 4.5 अरब यूरो आंकी गई। इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में रूसी कच्चे तेल का महत्व लगातार बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल कच्चे तेल आयात में भी मासिक आधार पर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान देश की कई प्रमुख रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए रूसी आपूर्ति का अधिक उपयोग कर रही हैं।
देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग इकाइयों में इस दौरान रूसी तेल की आपूर्ति में तेज वृद्धि देखने को मिली। जामनगर रिफाइनरी में रूस से आने वाले कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में 150 प्रतिशत बढ़ गया। वहीं पारादीप रिफाइनरी में यह वृद्धि 126 प्रतिशत रही। कोच्चि रिफाइनरी ने भी अपनी खरीद में 83 प्रतिशत का इजाफा किया, जबकि वाडिनार रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 45 प्रतिशत बढ़ी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रमुख रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल पर पहले से अधिक भरोसा जता रही हैं।
भारत की बढ़ी हुई मांग का असर रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात पर भी दिखाई दिया। जून के दौरान रूस के कच्चे तेल के निर्यात की मात्रा में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत कम रहने के कारण रूस की निर्यात आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली दैनिक आय घटकर 348 मिलियन यूरो रह गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि अधिक मात्रा में निर्यात होने के बावजूद कम कीमतों ने राजस्व पर दबाव बनाए रखा।
रूस के कुल जीवाश्म ईंधन निर्यात से होने वाली आय में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार निर्यात की मात्रा बढ़ने के बावजूद कुल दैनिक आय एक प्रतिशत घटकर 734 मिलियन यूरो रह गई। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और मांग के संतुलन को दर्शाती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से 488 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पाद और 444 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया। इससे स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार लगातार मजबूत बना हुआ है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि वैश्विक बाजार में कीमतें अनुकूल रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और लागत प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद को प्राथमिकता देता रह सकता है।
