सीमा पर बढ़ी सख्ती से लोगों को हुई परेशानी
सरकार के इस नियम के लागू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कस्टम चौकियों पर हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। दैनिक उपयोग की वस्तुओं के साथ यात्रा करने वाले लोगों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। चिप्स, बिस्कुट, केले और अन्य छोटे-मोटे सामानों पर भी कस्टम विभाग की सख्ती देखी जा रही थी। ₹100 की सीमा तय होने के कारण आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच कई बार कहासुनी और विवाद की स्थिति भी बन गई थी।
अधिवक्ताओं ने कोर्ट में दी थी चुनौती
इस फैसले के खिलाफ अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग्य सिंह और बिक्रम शाह ने नेपाल की सर्वोच्च अदालत में रिट याचिका दायर की थी। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को हुई, जिसमें न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और न्यायाधीश टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
सुप्रीम कोर्ट का अहम अंतरिम आदेश
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अर्थ मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन द्वारा दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर इस तरह की सख्ती उचित नहीं है। कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक बॉर्डर पर आम लोगों से दैनिक उपयोग के सामान पर कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा और स्थिति पूर्ववत सामान्य रखी जाएगी।
व्यापारियों और यात्रियों को राहत
इस फैसले के बाद सीमा क्षेत्र के छोटे व्यापारियों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। व्यापारियों का कहना है कि इस आदेश से अनावश्यक जांच-पड़ताल, विवाद और परेशानियों में कमी आएगी, जिससे सीमा पर व्यापार और आवाजाही पहले की तरह सुचारु हो सकेगी।
