इस बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि ईरान आखिर किस हथियार की बात कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह इशारा संभवतः ईरान के ‘हूट’ (Hoot) सुपर-कैविटेटिंग टॉरपीडो की ओर हो सकता है एक ऐसा अंडरवाटर हथियार जो अपनी रफ्तार और मारक क्षमता के लिए जाना जाता है।
‘हूट’ टॉरपीडो को लेकर कहा जाता है कि यह पारंपरिक टॉरपीडो से कई गुना तेज है। जहां सामान्य टॉरपीडो 60 से 100 किमी/घंटा की गति से चलते हैं, वहीं ईरान दावा करता है कि उसका हूट 300 किमी/घंटा से ज्यादा की रफ्तार पकड़ सकता है। इसकी खासियत है “सुपर-कैविटेशन” तकनीक, जिसमें टॉरपीडो अपने चारों ओर गैस का बुलबुला बनाता है, जिससे पानी का प्रतिरोध बेहद कम हो जाता है और यह तेज रफ्तार से लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
यह तकनीक सबसे पहले Russia ने अपने VA-111 Shkval टॉरपीडो में विकसित की थी। ईरान ने 2006 में हूट का परीक्षण किया था, लेकिन इसके बाद से इसकी क्षमताओं को लेकर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। यही कारण है कि इसे “सीक्रेट वेपन” के तौर पर पेश किया जाता है।
हालांकि, इस हथियार की ताकत जितनी चर्चा में है, उसकी सीमाएं भी उतनी ही अहम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज गति के कारण इसे नियंत्रित करना मुश्किल होता है। गैस के बुलबुले और शोर के कारण यह आसानी से सोनार सिस्टम में भी पकड़ा जा सकता है। यानी यह हथियार बेहद तेज जरूर है, लेकिन पूरी तरह अचूक नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह अमेरिकी युद्धपोतों या एयरक्राफ्ट कैरियर को नुकसान पहुंचा सकता है? United States के एयरक्राफ्ट कैरियर अत्याधुनिक सुरक्षा कवच, मल्टी-लेयर डिफेंस और हाई टेक रडार सिस्टम से लैस होते हैं। ऐसे में किसी एक टॉरपीडो से उन्हें डुबाना बेहद मुश्किल माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इस हथियार का इस्तेमाल करता भी है, तो उसका सबसे संभावित क्षेत्र Strait of Hormuz हो सकता है एक संकरा समुद्री मार्ग जहां जहाजों की आवाजाही सीमित रहती है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना आमतौर पर इस क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाए रखती है।
ईरान का “हार्ट अटैक हथियार” फिलहाल ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक संदेश नजर आता है, न कि तुरंत तबाही मचाने वाला गेम-चेंजर।फिर भी, मिडिल ईस्ट में बढ़ती बयानबाजी और सैन्य तैयारियों के बीच यह साफ है कि आने वाले समय में समुद्री युद्ध तकनीक और भी खतरनाक और जटिल हो सकती है।
