यह बैठक Centre for International Strategic Studies की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें पाकिस्तान के कई बड़े रक्षा विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा का मुख्य मुद्दा भारत की बदलती सैन्य रणनीति और भविष्य के युद्धों का नया स्वरूप रहा। विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध केवल सीमा पर टैंकों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि साइबर अटैक, हाइब्रिड वॉरफेयर, सूचना युद्ध और मानसिक दबाव जैसी रणनीतियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
पाकिस्तान के पूर्व ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी चेयरमैन जनरल जुबैर हयात ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और देशों को अब सिर्फ पारंपरिक हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। वहीं पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ रणनीतिकार लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) खालिद अहमद किदवई ने कहा कि हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान की “डिटरेंस पॉलिसी” की ताकत और कमजोरियों दोनों को सामने ला दिया है। उन्होंने संकेत दिए कि मई 2025 में भारत-पाक तनाव के बाद पाकिस्तान अपनी सुरक्षा रणनीति की समीक्षा कर रहा है।
बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने माना कि भारत तेजी से रक्षा आधुनिकीकरण, साइबर क्षमता और हाई-प्रिसिजन हथियारों पर काम कर रहा है। यही कारण है कि पाकिस्तान अब अपने “डिटरेंस मॉडल” को नए खतरों के हिसाब से ढालने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के रणनीतिक योजनाकारों का मानना है कि भविष्य में सीमित सैन्य कार्रवाई, साइबर हमले और सूचना युद्ध किसी भी संकट को तेजी से बड़े टकराव में बदल सकते हैं।
इस दौरान पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक जमीर अकरम ने दावा किया कि भारत की मौजूदा रणनीति से क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ रही है। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल आतंकवाद और सीमा पार खतरों के खिलाफ जवाबी सुरक्षा नीति का हिस्सा है। भारत का साफ कहना है कि क्षेत्रीय शांति तभी संभव है जब आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाएं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य ठिकानों को टारगेट करने की कोशिश हुई, जिसके जवाब में भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों से पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला किया था। भारत द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों ने इन हमलों की पुष्टि भी की थी।
अब पाकिस्तान में हो रही रणनीतिक बैठकों और बदलते बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि भारत की सैन्य और तकनीकी ताकत ने इस्लामाबाद की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि पाकिस्तान अब भविष्य के युद्धों के लिए अपनी परमाणु और रक्षा नीति को नए सिरे से तैयार करने में जुटा हुआ है।
