धरती से 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद है यह ग्रह
एलएचएस 3844 बी पृथ्वी से लगभग 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और आकार में हमारे ग्रह से करीब 30% बड़ा है। इसे सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा गया है। सुपर-अर्थ वे ग्रह होते हैं जो पृथ्वी से बड़े तो होते हैं, लेकिन गैसीय दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते।
बेहद तेज कक्षा में घूमता है ग्रह
यह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब है और केवल 11 घंटे में अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस तेज परिक्रमा के कारण इसकी सतह पर अत्यधिक तापमान और कठोर परिस्थितियां बनी रहती हैं।
वातावरण का कोई संकेत नहीं
शोध में यह पाया गया है कि ग्रह पर किसी भी प्रकार का वातावरण मौजूद नहीं है। न तो वहां गैसीय परत है जो तापमान को नियंत्रित कर सके और न ही सतह को विकिरण से बचा सके। इसका मतलब यह है कि ग्रह सीधे अंतरिक्षीय विकिरण और उल्कापिंडों के प्रभाव में रहता है।
बेसाल्ट जैसी चट्टानी सतह के संकेत
वैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह की सतह पृथ्वी जैसी नहीं है। प्रारंभिक विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि इसकी सतह बेसाल्ट चट्टानों से बनी हो सकती है, जो ज्वालामुखीय लावा के ठंडा होने से बनती हैं।
एमआईआरआई उपकरण ने निभाई अहम भूमिका
इस अध्ययन में जेम्स वेब टेलीस्कोप पर लगे मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपकरण ने ग्रह से आने वाली इन्फ्रारेड रोशनी का विश्लेषण किया और सतह के तापीय गुणों का अध्ययन संभव बनाया। वैज्ञानिक सीधे ग्रह की तस्वीर लेने में सफल नहीं हो सके, लेकिन ग्रह और उसके तारे से आने वाले प्रकाश में सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर स्पेक्ट्रम तैयार किया गया, जिससे उसकी सतह की संरचना का अनुमान लगाया गया।
भविष्य की खोजों के लिए बड़ी उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य में अन्य चट्टानी ग्रहों की सतह और भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह संभावना बढ़ती है कि आने वाले समय में दूरस्थ ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की भी गहराई से जांच की जा सकेगी।
