ट्रम्प ने दावा किया कि इस आर्थिक दबाव के कारण दोनों देशों ने पीछे हटने का फैसला किया और संभावित बड़े युद्ध को टाल दिया गया। उन्होंने यहां तक कहा कि इस फैसले से 30 से 50 मिलियन लोगों की जान बचाई गई।
इसके अलावा ट्रम्प ने यह भी कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने दुनिया भर में करीब 8 संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई और कई देशों से उन्हें इसके लिए धन्यवाद पत्र भी मिले।
भारत का रुख
हालांकि भारत ने ट्रम्प के इस दावे को सिरे से खारिज किया है। भारतीय पक्ष के अनुसार, संघर्ष विराम किसी बाहरी दबाव से नहीं बल्कि सैन्य स्तर पर बातचीत के जरिए हुआ था। भारत का कहना है कि यह सहमति दोनों देशों के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के बीच सीधे संवाद के बाद बनी थी।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में Operation Sindoor के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद स्थिति नियंत्रित हुई और दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आई।
स्थिति
भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। सीमापार आतंकवाद और सैन्य टकराव अक्सर तनाव का कारण बनते रहे हैं। ऐसे में किसी भी बाहरी शक्ति की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहते हैं।
ट्रम्प का यह दावा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, लेकिन भारत ने इसे स्वीकार नहीं किया है।
