मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पोटैशियम का बढ़ना हाइपरकलेमिया कहलाता है, जो दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी वजह से डायलिसिस मरीजों को हमेशा लो-पोटैशियम डाइट लेने की सलाह दी जाती है।
शिमला मिर्च को आमतौर पर एक हल्की और सुरक्षित सब्जी माना जाता है। पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम कच्ची हरी शिमला मिर्च में लगभग 170 से 180 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है। लाल और पीली शिमला मिर्च में यह मात्रा थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे अन्य कई सब्जियों और फलों की तुलना में कम पोटैशियम वाला भोजन माना जाता है।
इसके अलावा शिमला मिर्च में विटामिन C, विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि डायलिसिस मरीज इसे पूरी तरह बंद करने की बजाय सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं। इसे मुख्य भोजन का बड़ा हिस्सा नहीं बनाना चाहिए और अन्य हाई-पोटैशियम फूड जैसे टमाटर या आलू के साथ मिलाकर अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।
हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी आहार को अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
