असल में किचन स्पंज का सबसे बड़ा मुद्दा कैंसर नहीं बल्कि उसमें पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। जब स्पंज लंबे समय तक गीला रहता है और उसमें खाने के छोटे कण फंस जाते हैं, तो यह बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। ऐसे में इसका उपयोग करने पर ये हानिकारक सूक्ष्मजीव बर्तनों और भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि किचन स्पंज सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसलिए इसे लेकर जो दावा वायरल हो रहा है, वह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। कैंसर जैसी बीमारी के कारण जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, जिनका संबंध सामान्य घरेलू स्पंज से नहीं पाया गया है।
विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि खराब किचन हाइजीन कई तरह के संक्रमणों को बढ़ावा दे सकती है। गंदा स्पंज बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है, जो खाने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और समय-समय पर बदलना जरूरी माना जाता है।
सेहत विशेषज्ञों के अनुसार किचन स्पंज को कुछ हफ्तों के अंतराल पर बदल देना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी से समय-समय पर उसकी सफाई करना और अलग-अलग कामों के लिए अलग स्क्रबर का उपयोग करना भी बेहतर माना जाता है।
कुल मिलाकर, किचन स्पंज से कैंसर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की अनदेखी निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए असली ध्यान डर पर नहीं, बल्कि सही हाइजीन आदतों पर देना चाहिए।
