जानकारों के अनुसार सबसे बड़ी गलती यह होती है कि कई लोग गोंद कतीरा को पूरी तरह से भिगोए बिना या कम समय के लिए भिगोकर ही सेवन कर लेते हैं। यह तरीका शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है क्योंकि अधपका या सूखा गोंद कतीरा पेट में जाकर फूल सकता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस, ऐंठन और अपच जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
सही तरीका यह बताया जाता है कि गोंद कतीरा को हमेशा पर्याप्त समय देकर पानी में भिगोना चाहिए। आमतौर पर एक से दो चम्मच मात्रा को रातभर लगभग आठ से दस घंटे तक पानी में रखने पर यह पूरी तरह फूलकर जेली जैसी बनावट में बदल जाता है। इसके बाद ही इसका सेवन करना सुरक्षित माना जाता है।
भीगे हुए गोंद कतीरा को ठंडाई, शरबत, दूध या अन्य पारंपरिक पेय में मिलाकर लिया जा सकता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ गर्मी से राहत पहुंचाने में भी मदद करता है। गर्म मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक माना जाता है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इसकी मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक सेवन करने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है और अन्य शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सामान्य रूप से सीमित मात्रा में ही इसका उपयोग करना सुरक्षित माना जाता है।
इसके अलावा सही तरीके से उपयोग करने पर गोंद कतीरा शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है और कुछ हद तक जोड़ों तथा हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। लेकिन इसका पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही विधि और संतुलित मात्रा में लिया जाए।
गर्मियों में प्राकृतिक उपाय अपनाते समय सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी या गलत तरीका किसी भी फायदेमंद चीज को नुकसानदायक बना सकता है।
