कब और कैसे हुई शुरुआत?
अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस की शुरुआत साल 2012 में हुई थी। इसे इजरायल के उद्यमी बेन लैंग ने शुरू किया था। उनका उद्देश्य लोगों को एक ऐसे भोजन के जरिए जोड़ना था जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक भी हो। सोशल मीडिया और फूड कम्युनिटी की मदद से यह दिन धीरे-धीरे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय होता गया। आज कई देशों में इस दिन फूड फेस्टिवल, ऑनलाइन कैंपेन और खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हेल्दी खानपान के प्रति जागरूक करना और मिडिल ईस्ट की पारंपरिक फूड संस्कृति को बढ़ावा देना है। हम्मस को “सुपरफूड” माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और हेल्दी फैट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मिश्रण है।इसके अलावा यह दिवस अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों को भोजन के माध्यम से जोड़ने का संदेश भी देता है।
क्या है हम्मस?
हम्मस एक क्रीमी डिश है, जिसे उबले हुए चने, ताहिनी (तिल का पेस्ट), जैतून तेल, नींबू रस और लहसुन से तैयार किया जाता है। इसे ब्रेड, सलाद, स्नैक्स और सब्जियों के साथ खाया जाता है।आज के समय में क्लासिक हम्मस के अलावा बीटरूट, एवोकाडो, स्पाइसी और पेरि-पेरि फ्लेवर भी काफी लोकप्रिय हो चुके हैं।
क्या है इसकी खासियत?
यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है।
वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है।
दिल और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
कम तेल और हेल्दी फैट्स के कारण फिटनेस पसंद लोगों की पहली पसंद बन रहा है।
इसे शाकाहारी और वीगन डाइट में भी आसानी से शामिल किया जा सकता है।
भारत में बढ़ती लोकप्रियता
भारत में भी अब हम्मस तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बड़े शहरों के कैफे और रेस्टोरेंट्स में इसे हेल्दी स्नैक और डिप के रूप में परोसा जा रहा है। युवा पीढ़ी इसे मेयोनीज और अनहेल्दी डिप्स के बेहतर विकल्प के तौर पर देख रही है। अंतर्राष्ट्रीय हम्मस दिवस केवल एक डिश का उत्सव नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, स्वाद और सांस्कृतिक मेलजोल का प्रतीक है। 13 मई का यह दिन लोगों को यह संदेश देता है कि हेल्दी खाना भी स्वादिष्ट हो सकता है और भोजन दुनियाभर के लोगों को एक साथ जोड़ने की ताकत रखता है।
