धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी को मोक्षदायिनी तिथि माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से 100 यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। साथ ही जीवन में धन, समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है। यही नहीं, यह व्रत पापों के नाश और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी खोलता है।
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून 2026 को सुबह 12 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी और उसी दिन रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर परमा एकादशी का व्रत 11 जून, गुरुवार को ही रखा जाएगा। इसके अगले दिन 12 जून को व्रत का पारण किया जाएगा, जिसका शुभ समय सुबह 5 बजकर 23 मिनट से 8 बजकर 10 मिनट तक बताया गया है।
परमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। पूजा के दौरान पीले वस्त्रों का उपयोग शुभ माना जाता है। इस दिन भक्त पीले कपड़े पर चांदी का सिक्का और हल्दी की गांठ रखकर पूजा करते हैं और उसे बाद में तिजोरी या धन स्थान पर रख देते हैं। मान्यता है कि इससे घर में धन और समृद्धि बढ़ती है।
इसके अलावा इस दिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का चौमुखी दीपक जलाने का भी विशेष महत्व बताया गया है। दीपक में हल्दी या कुमकुम मिलाना शुभ माना जाता है। भक्त तुलसी की परिक्रमा करते हुए मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि परिक्रमा के दौरान तुलसी पौधे को स्पर्श नहीं किया जाता।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भी कहा गया है कि यदि इस दिन व्रत और पूजा का अवसर चूक गया, तो ऐसा दुर्लभ योग लंबे समय तक फिर नहीं मिलता। यही कारण है कि श्रद्धालु इस तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं और पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं।
परमा एकादशी केवल एक व्रत नहीं बल्कि आस्था, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है। यह दिन भक्तों को भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर अपने जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर प्रदान करता है।
